चंडीगढ़ में भाजपा मुख्यालय के बाहर हुए हमले को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। इस मामले में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने केंद्र सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर सीधा निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ की कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी पूरी तरह केंद्र सरकार की है, इसलिए इस घटना के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराना गलत है।
गांव चीमा में एक कम्युनिटी हेल्थ सेंटर के उद्घाटन के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए भगवंत मान ने कहा कि चंडीगढ़ का प्रशासन राज्यपाल के अधीन आता है, जो केंद्र सरकार के नियंत्रण में होता है। इसके बावजूद भाजपा की अगुवाई वाली केंद्र सरकार हर मुद्दे पर पंजाब सरकार को घेरने की कोशिश करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसान आंदोलन, पंजाब यूनिवर्सिटी के विरोध प्रदर्शन और अन्य घटनाओं के लिए भी बार-बार उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाता है, जो पूरी तरह अनुचित है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर केंद्र सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाने में असफल हो रही है, तो उसे चंडीगढ़ का प्रशासन पंजाब सरकार को सौंप देना चाहिए। उन्होंने भाजपा पर “बेबुनियाद और भ्रामक बयानबाजी” करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस तरह की राजनीति से बचना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जब पंजाब चंडीगढ़ पर अपना अधिकार जताता है, तो इसे अलगाववादी सोच करार दिया जाता है, जबकि हकीकत यह है कि केंद्र सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने में विफल रही है।
इस दौरान भगवंत मान ने हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा लगाए गए एंट्री टैक्स के मुद्दे पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कांग्रेस सरकार के इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि एक ओर पंजाब सरकार टोल टैक्स खत्म कर आम जनता को राहत दे रही है, वहीं दूसरी ओर पड़ोसी राज्य लोगों पर अतिरिक्त टैक्स का बोझ डाल रहे हैं। उन्होंने इसे अनुचित बताते हुए इसके खिलाफ हर स्तर पर विरोध करने की बात कही।
किसानों के मुद्दे पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आढ़तियों और किसानों की जायज मांगों को केंद्र सरकार के समक्ष उठाया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पंजाब सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और फसल खरीद प्रक्रिया को सुचारू और परेशानी मुक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
चंडीगढ़ हमले को लेकर जारी इस राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच सुरक्षा व्यवस्था और जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है, जिससे सियासी माहौल और गरमा सकता है।

