उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के वृंदावन में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने समाज, संस्कृति और राष्ट्र की भूमिका पर विस्तार से अपने विचार रखे। वह मलूक पीठ गौशाला में आयोजित 452वें जयंती महोत्सव में शामिल हुए, जहां योग गुरु बाबा रामदेव समेत संत समाज की बड़ी संख्या मौजूद रही। इस दौरान भागवत ने आश्रम में पूजा-अर्चना की और कार्यक्रम के आध्यात्मिक वातावरण की सराहना की।
अपने संबोधन में मोहन भागवत ने कहा कि वृंदावन का वातावरण इतना शांत और आध्यात्मिक है कि यहां बोलने से ज्यादा मौन रहना उचित प्रतीत होता है। उन्होंने भारत की वैश्विक भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि “भारत दुनिया की आत्मा है” और जब तक देश अपने मूल्यों और परंपराओं के साथ खड़ा रहेगा, तब तक विश्व में संतुलन बना रहेगा। उनके अनुसार, आज दुनिया भटकाव की स्थिति में है क्योंकि उसने अपनी मूल आत्मा से दूरी बना ली है।
गौसंरक्षण के मुद्दे पर बोलते हुए मोहन भागवत ने कहा कि यदि समाज गौभक्त बन जाए तो गौहत्या अपने आप रुक सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज की भागीदारी और जागरूकता बेहद जरूरी है। उनका मानना है कि जब समाज में गाय के प्रति सम्मान और श्रद्धा बढ़ेगी, तो इस समस्या का समाधान स्वतः निकल आएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारें इस दिशा में काम करना चाहती हैं, लेकिन उन्हें कई व्यावहारिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, इसलिए समाज का सहयोग अनिवार्य है।
उन्होंने आगे कहा कि जनभावना किसी भी बड़े बदलाव की सबसे बड़ी ताकत होती है। इसी संदर्भ में उन्होंने राम मंदिर निर्माण का उदाहरण देते हुए कहा कि 2014 से 2019 के बीच यह कार्य संभव नहीं हो पाया, लेकिन 2019 के बाद जनसमर्थन मजबूत हुआ और रास्ता साफ हो गया। उनका कहना था कि यदि गौसंरक्षण को लेकर भी ऐसी ही मजबूत जनभावना तैयार हो जाए, तो समाधान संभव है।
कार्यक्रम में मोहन भागवत ने संत समाज और संघ के बीच सहयोग की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि संत समाज मार्गदर्शन देने का कार्य करेगा और संघ उनके साथ मिलकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में काम करेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में भारत एक बार फिर “विश्व गुरु” के रूप में उभरेगा और पूरी दुनिया को नई दिशा देने में सक्षम होगा।

