पंजाब में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हालिया छापेमारी को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। राज्य के मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने इस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं को डराने और दबाव बनाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
कैबिनेट मंत्री Sanjeev Arora के आवास पर हुई छापेमारी के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि यह लोकतंत्र के खिलाफ कदम है और इसे तानाशाही की ओर बढ़ता हुआ रुझान बताया। उन्होंने दावा किया कि उनके कई नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की गई, उन्हें जेल भी भेजा गया, लेकिन अब तक किसी भी मामले में आरोप साबित नहीं हो पाए हैं।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने यह भी सवाल उठाया कि केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई अक्सर विपक्षी दलों के नेताओं पर ही क्यों केंद्रित रहती है। उनका कहना था कि यह केवल संयोग नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है, जिसके जरिए चुनावी फायदा उठाने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी जनता के समर्थन के बजाय एजेंसियों के सहारे चुनावी बढ़त हासिल करना चाहती है। मान ने कहा कि पंजाब में हाल ही के चुनावी नतीजों में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा, जिसके बाद अब इस तरह की कार्रवाई के जरिए राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा है।
इस पूरे मामले पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक Arvind Kejriwal ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में पार्टी नेताओं पर लगातार छापेमारी हो रही है, लेकिन अब तक किसी भी कार्रवाई में ठोस सबूत या काला धन सामने नहीं आया है। केजरीवाल ने सवाल किया कि यदि आरोप इतने गंभीर हैं, तो फिर जांच एजेंसियां अब तक क्या हासिल कर पाई हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि देश की जनता इन घटनाओं को देख रही है और समझ रही है कि राजनीतिक लाभ के लिए किस तरह की रणनीतियां अपनाई जा रही हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने पंजाब की राजनीति में एक बार फिर केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव को उजागर कर दिया है, जो आने वाले चुनावों से पहले और तेज होने की संभावना है।

