लोकसभा में शुक्रवार को संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 पर हुई अहम वोटिंग में सरकार को बड़ा झटका लगा, जब यह बिल आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका और गिर गया। महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले कानून में संशोधन से जुड़े इस विधेयक के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने इसका विरोध किया। इस नतीजे के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिली।
सरकार का कहना था कि यह संशोधन महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से लाया गया है, जिसे परिसीमन (डीलिमिटेशन) के आधार पर लागू किया जाना था। हालांकि विपक्ष ने इस प्रावधान का विरोध करते हुए मांग की कि मौजूदा 543 लोकसभा सीटों पर ही सीधे 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाए, न कि भविष्य में सीटों की संख्या बढ़ने के बाद।
विधेयक पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर महिला आरक्षण का विरोध करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल विभिन्न शर्तों और आपत्तियों के जरिए इस कानून को लागू होने से रोकना चाहते हैं। शाह ने यह भी कहा कि परिसीमन संविधान का हिस्सा है और सीटों की संख्या बढ़ाना जनसंख्या के लिहाज से जरूरी है।
वहीं विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार के इस कदम पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह बिल महिलाओं के सशक्तिकरण से अधिक देश के चुनावी नक्शे को बदलने की कोशिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे दलित, पिछड़े और आदिवासी वर्गों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। बहस के दौरान राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री को लेकर दिए गए कुछ बयान पर सदन में हंगामा भी हुआ, जिस पर सत्ता पक्ष के नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने राहुल गांधी के बयान की आलोचना करते हुए इसे अनुचित बताया और उनसे माफी की मांग की। इस दौरान सदन में कई बार शोर-शराबा और नारेबाजी भी देखने को मिली।
बहस में अन्य दलों के नेताओं ने भी अपनी-अपनी चिंताएं रखीं। कांग्रेस सांसद शशि थरूर और डीएमके सांसद कनिमोझी ने महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने पर आपत्ति जताई और इसे जटिल प्रक्रिया बताया। उनका कहना था कि इससे संघीय ढांचे पर असर पड़ सकता है और कुछ राज्यों के प्रतिनिधित्व में असंतुलन पैदा हो सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन में अपील करते हुए कहा कि महिला आरक्षण देश की आधी आबादी को उनका हक दिलाने का प्रयास है और इसमें किसी तरह का भेदभाव नहीं होगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि परिसीमन की प्रक्रिया निष्पक्ष होगी और सभी राज्यों के साथ समान व्यवहार किया जाएगा।
हालांकि, अंततः वोटिंग में बिल पास नहीं हो सका। इसके बाद सरकार ने संकेत दिया कि वह महिलाओं को अधिकार दिलाने के अपने प्रयास जारी रखेगी। इस घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे मुद्दों पर राजनीतिक सहमति बनाना अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।

