उत्तर प्रदेश में शिक्षामित्रों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने उनके मानदेय में बढ़ोतरी के फैसले को लागू करते हुए 250 करोड़ रुपये का फंड जारी कर दिया है। इस निर्णय के तहत अब प्रदेश के करीब 1.42 लाख शिक्षामित्रों को हर महीने 18 हजार रुपये मानदेय दिया जाएगा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार यह बढ़ा हुआ मानदेय 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा। इससे पहले मार्च में ही मानदेय को 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 18 हजार रुपये करने का निर्णय लिया गया था। अब बेसिक शिक्षा विभाग ने इसे लागू करते हुए सभी जिलों को आवश्यक बजट आवंटित कर दिया है, ताकि समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जा सके।
बेसिक शिक्षा निदेशक की ओर से 23 अप्रैल 2026 को जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह धनराशि “शिक्षामित्रों को मानदेय भुगतान (जिला योजना)” के तहत दी गई है। जिलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस राशि का उपयोग केवल मानदेय भुगतान के लिए करें और इसे एकमुश्त निकालने के बजाय मासिक आवश्यकता के अनुसार ही आहरित करें। साथ ही अगली किस्त जारी होने से पहले उपयोगिता प्रमाण पत्र देना भी अनिवार्य होगा, जिससे वित्तीय पारदर्शिता बनी रहे।
इस फैसले का शिक्षामित्रों के बीच सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। लंबे समय से कम मानदेय के कारण आर्थिक दबाव झेल रहे शिक्षामित्रों को अब राहत मिलने की उम्मीद है। उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि महंगाई के दौर में यह बढ़ोतरी शिक्षामित्रों के लिए बड़ी मदद साबित होगी।
प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में कार्यरत शिक्षामित्रों को आमतौर पर 11 महीने का मानदेय दिया जाता है। ऐसे में बढ़ी हुई राशि उनके जीवन स्तर में सुधार लाने के साथ-साथ शिक्षा व्यवस्था पर भी सकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। सरकार का मानना है कि बेहतर आर्थिक स्थिति मिलने से शिक्षामित्र अपने कार्य पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।
कुल मिलाकर, यह कदम न केवल शिक्षामित्रों के लिए आर्थिक राहत लेकर आया है, बल्कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

