राजस्थान के कोटा से एक बेहद संवेदनशील और चिंताजनक मामला सामने आया है। प्रसव के बाद गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही पांच महिलाओं ने अपनी किडनी फेल होने का दावा करते हुए इच्छामृत्यु की मांग की है। इस घटना ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था और मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, सभी महिलाएं प्रसव के बाद से लगातार गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रही हैं। उनका आरोप है कि इलाज के बावजूद उनकी हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ और किडनी खराब होने के कारण उन्हें नियमित चिकित्सा और डायलिसिस जैसी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ रहा है। आर्थिक और शारीरिक परेशानियों के चलते उन्होंने इच्छामृत्यु की मांग उठाई है।
महिलाओं और उनके परिजनों का कहना है कि लंबे समय से इलाज का खर्च उठाना उनके लिए बेहद कठिन हो गया है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, बेहतर इलाज उपलब्ध कराने और आर्थिक सहायता देने की मांग भी की है। इस बीच, इच्छामृत्यु की मांग ने पूरे मामले को और अधिक गंभीर बना दिया है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने मामले की जानकारी मिलने के बाद संबंधित रिपोर्ट तलब की है। यदि प्रसव के दौरान उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है, तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि किडनी फेल होने के कारणों का पता विस्तृत चिकित्सकीय जांच के बाद ही लगाया जा सकता है और बिना जांच किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
फिलहाल यह मामला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के संज्ञान में है। सभी की नजर अब इस बात पर है कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और प्रभावित महिलाओं को किस प्रकार की चिकित्सा, आर्थिक सहायता और न्याय मिल पाता है।
