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वक्‍फ बिल पर JPC में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत , सत्ता पक्ष के हर प्रस्ताव को मंजूरी, विपक्ष की एक नहीं चली

वक्फ संशोधन बिल पर चर्चा कर रही संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) ने सोमवार को बीजेपी और एनडीए द्वारा पेश किए गए सभी संशोधनों को मंजूरी दे दी, जबकि विपक्ष के द्वारा किए गए सभी बदलावों को अस्वीकार कर दिया। बैठक के बाद जेपीसी के अध्यक्ष, जगदंबिका पाल ने संवाददाताओं से कहा कि समिति द्वारा अपनाए गए संशोधन कानून को और अधिक प्रभावी और बेहतर बनाएंगे। वक्फ बोर्ड संशोधन बिल 2024 पर संसदीय पैनल के सदस्यों ने मसौदा कानून में कुल 572 संशोधनों का प्रस्ताव दिया था।

जेपीसी की बैठक के बाद विपक्षी सांसदों ने कार्यवाही की कड़ी आलोचना करते हुए, जगदंबिका पाल पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नष्ट करने का आरोप लगाया। टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने इसे हास्यास्पद प्रक्रिया बताया और कहा कि उनकी बात नहीं सुनी गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जेपीसी अध्यक्ष ने तानाशाही रवैया अपनाया है। दूसरी ओर, जगदंबिका पाल ने अपनी सफाई में कहा कि पूरी प्रक्रिया लोकतांत्रिक थी और बहुमत से निर्णय लिया गया है। बैठक से पहले, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एनडीए सांसदों के साथ बैठक की थी और उन्हें एकजुट रहने की सलाह दी थी।

जेपीसी अध्यक्ष ने कहा कि विधेयक के 14 खंडों में एनडीए सांसदों द्वारा पेश किए गए संशोधनों को स्वीकृति दी गई, जबकि विपक्षी सांसदों द्वारा पेश किए गए संशोधनों को सभी 44 खंडों में से वोटिंग के बाद खारिज कर दिया गया। सोमवार को सुबह 11 बजे वक्फ विधेयक पर चर्चा की गई, जिसमें प्रत्येक क्लॉज पर विचार किया गया। बैठक से पहले, जगदंबिका पाल ने आईएएनएस से बातचीत में कहा था कि आज वक्फ बोर्ड के संशोधनों पर चर्चा की जाएगी और सभी पक्षों के विचार पर वोटिंग होगी। अगर सहमति बनी तो क्लॉज स्वीकृत होंगे, अन्यथा वोटिंग होगी।

जेपीसी की पिछली बैठक में हंगामा हुआ था, जिसके बाद 10 विपक्षी सांसदों को निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद विपक्षी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से निष्पक्ष चर्चा की मांग करते हुए पत्र लिखा था। पिछली बैठक के हंगामे पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने आईएएनएस से बातचीत में कहा था कि संसदीय परंपराओं का उल्लंघन किया जा रहा है और यह विधेयक वक्फ संपत्तियों को हड़पने की साजिश लग रही है। उनका यह भी कहना था कि इस विधेयक को जल्दबाजी में पास करने से सभी पक्षों को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिलेगा।

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