नई दिल्ली: दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी ने भारी बहुमत के साथ सत्ता हासिल कर ली है। रेखा गुप्ता ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है और उनकी कैबिनेट सरकार की नीतियों को लागू करने में सक्रिय हो गई है। इसी बीच, राजधानी में एक बार फिर अकबर, बाबर और हुमायूं के नाम पर बनी सड़कों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
आज सुबह तीन युवक दिल्ली के अकबर-बाबर रोड पर पहुंचे और वहां लगे साइनबोर्ड पर कालिख पोत दी। इसके साथ ही, उन्होंने जोरदार नारेबाजी करते हुए जल्द से जल्द इन सड़कों के नाम बदलने की मांग उठाई।
प्रदर्शनकारियों ने कालिख पोतने के बाद छत्रपति शिवाजी महाराज के पोस्टर सड़क के साइनबोर्ड पर चिपका दिए और उनका दूध से अभिषेक किया। इन युवकों का कहना था कि मुगल शासक भारतीय इतिहास पर एक काला धब्बा हैं और उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज के साथ अन्याय किया था। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि किसी भी आक्रमणकारी के नाम पर देश की सड़कों और धरोहरों का नाम नहीं होना चाहिए।
एनडीएमसी के कर्मचारियों ने अकबर रोड के साइनबोर्ड से कालिख हटा दी और प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए पोस्टर भी हटा दिए। हालांकि, इन युवकों ने यह स्पष्ट किया कि वे चाहते हैं कि इस सड़क का नाम आधिकारिक रूप से छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर रखा जाए।
इन प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे यह कदम अपने पूर्वजों के सम्मान की रक्षा के लिए उठा रहे हैं और इसका मकसद देश के प्रति कोई विद्रोही भावना नहीं है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इन सड़कों के नाम जल्द से जल्द बदले जाएं।

