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प्रॉपर्टी रजिस्ट्री में किन व्यक्तियों को गवाह बनने की अनुमति नहीं होती, जानें कानून क्या कहता है

भारत में हर दिन हजारों करोड़ रुपये की संपत्तियों की खरीद और बिक्री होती है। वर्तमान समय में देश में बड़ी मात्रा में प्रॉपर्टी डील हो रही है। जैसा कि हम जानते हैं, प्रॉपर्टी से जुड़ी लेन-देन की प्रक्रिया काफी जटिल और संवेदनशील होती है। इसे सुरक्षित और सुचारू रूप से संचालित करने के लिए सरकार ने कई नियम और कानून बनाए हैं।

किसी भी प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री में “रजिस्ट्री” सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है। रजिस्ट्री पूरी होने के बाद ही संपत्ति का स्वामित्व बेचने वाले से खरीदने वाले के नाम पर स्थानांतरित होता है।

प्रॉपर्टी रजिस्ट्री में गवाहों की भूमिका

किसी भी संपत्ति की रजिस्ट्री के लिए दो गवाहों की आवश्यकता होती है। गवाहों की मौजूदगी के बिना रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकती। रजिस्ट्री के दौरान गवाहों की उपस्थिति अनिवार्य होती है और उनके चयन को लेकर कुछ नियम निर्धारित किए गए हैं।

किन लोगों को गवाह नहीं बनाया जा सकता?

  1. अप्रাপ্ত वयस्क (18 वर्ष से कम उम्र) – कोई भी नाबालिग व्यक्ति संपत्ति रजिस्ट्री में गवाह नहीं बन सकता।
  2. खरीदने और बेचने वाले पक्ष – संपत्ति का विक्रेता और खरीदार स्वयं गवाह नहीं बन सकते।
  3. मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति – कोई भी ऐसा व्यक्ति जिसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है, वह गवाह नहीं बन सकता। गवाह बनने के लिए यह आवश्यक है कि व्यक्ति को समझ हो कि संपत्ति की डील किन शर्तों पर और किस मूल्य पर हो रही है।

रजिस्ट्री की कानूनी प्रक्रिया

संपत्ति की रजिस्ट्री भारतीय पंजीकरण अधिनियम, 1908 के अंतर्गत की जाती है। यह कानून संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों के पंजीकरण, साक्ष्यों को संरक्षित करने, धोखाधड़ी को रोकने और स्वामित्व सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है।

इस अधिनियम का उद्देश्य संपत्ति से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया को पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार के विवाद से बचा जा सके।

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