उत्तर प्रदेश के Sonbhadra जिले के दुद्धी तहसील क्षेत्र में आदिवासी जमीनों से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें कथित तौर पर बाहरी राज्यों से आए कुछ लोगों द्वारा अनुसूचित जनजाति (ST) की महिलाओं के नाम पर जमीन खरीदकर कब्जा करने की बात सामने आई है। प्रशासनिक जांच में यह पाया गया कि कुछ मामलों में वैवाहिक संबंधों और दस्तावेजी प्रक्रियाओं का उपयोग करते हुए जमीनों का हस्तांतरण किया गया, जबकि वास्तविक नियंत्रण अन्य व्यक्तियों के पास था।
जांच के अनुसार, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार से आए कुछ लोगों ने स्थानीय महिलाओं से विवाह कर उनके नाम पर जमीन की रजिस्ट्रियां कराईं। नियमों के तहत आदिवासी जमीन केवल आदिवासी के नाम पर ही खरीदी जा सकती है, ऐसे में इस प्रावधान का दुरुपयोग किए जाने की आशंका जताई गई है। प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए करीब 15 बीघा जमीन को वापस सरकारी खाते में दर्ज कराया है और इस पूरे मामले में शामिल संदिग्धों के खिलाफ जांच तेज कर दी गई है।
प्रारंभिक जांच में कुछ नाम जैसे बहादुर अली, सिराज और तनवीर सामने आए हैं, जिन पर आरोप है कि उन्होंने वैवाहिक संबंधों के माध्यम से जमीन खरीदी और बाद में अन्य लोगों को वहां बसाया। कई स्थानों पर यह भी पाया गया कि जमीन आदिवासी महिलाओं के नाम पर थी, लेकिन उसका उपयोग और नियंत्रण अन्य लोगों द्वारा किया जा रहा था। इस प्रक्रिया में स्थानीय स्तर पर जनसंख्या में वृद्धि और बाहरी लोगों के बसने की भी जानकारी सामने आई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ मामलों में आदिवासी परिवारों को आर्थिक लालच देकर या अन्य तरीकों से उनके नाम का इस्तेमाल जमीन खरीद के लिए किया गया। वहीं, एक पीड़िता रेणु कुमारी ने आरोप लगाया कि उस पर जबरन शादी का दबाव बनाया गया और उसे धमकियां भी दी गईं। इस तरह के आरोपों को देखते हुए प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सुरक्षा और कानूनी कार्रवाई दोनों स्तरों पर कदम उठाए हैं।
प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, यह पूरा मामला सुनियोजित तरीके से जमीन के हस्तांतरण और कब्जे से जुड़ा हो सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है और अन्य संभावित मामलों की भी जांच जारी है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि आदिवासी जमीनों की सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे और किसी भी तरह की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

