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संसद में किताबों को लेकर सियासी संग्राम, निशिकांत दुबे के बयान से लोकसभा में हंगामा

लोकसभा के बजट सत्र के दौरान बुधवार को उस समय भारी हंगामा देखने को मिला, जब भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने सदन में नेहरू–गांधी परिवार से जुड़ी कई किताबों का जिक्र किया। इन किताबों में कथित तौर पर जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और सोनिया गांधी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां होने का दावा किया गया। दुबे के बयान के बाद सदन में विपक्षी सांसदों ने तीखा विरोध जताया, जिसके चलते कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा।

दरअसल, संसद के मौजूदा सत्र में पूर्व सेना प्रमुख (रिटायर्ड) जनरल एमएम नरवणे की किताब को लेकर पहले से ही सियासी घमासान चल रहा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी इस किताब के हवाले से चीनी घुसपैठ का मुद्दा उठाकर सरकार को घेर रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में बुधवार को भाजपा सांसद निशिकांत दुबे कुछ किताबें लेकर सदन में पहुंचे और उन्होंने कहा कि आज एक ऐसी किताब पर चर्चा हो रही है, जो अभी प्रकाशित भी नहीं हुई है, जबकि बाजार में पहले से कई ऐसी किताबें मौजूद हैं, जिनमें नेहरू परिवार को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

निशिकांत दुबे ने अपने बयान में ‘एडविना एंड नेहरू’ समेत 3–4 अन्य किताबों का उल्लेख किया और दावा किया कि इन पुस्तकों में नेहरू परिवार की भूमिका को लेकर कठोर टिप्पणियां की गई हैं। जैसे ही दुबे ने इन किताबों का जिक्र किया, विपक्षी सांसदों ने जोरदार हंगामा शुरू कर दिया। लोकसभा स्पीकर ने कई बार दुबे को टोकने की कोशिश की, लेकिन वह अपनी बात रखते रहे, जिससे सदन का माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया।

हालात बेकाबू होते देख आखिरकार लोकसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। मामला यहीं खत्म नहीं हुआ, बाद में स्पीकर के चैंबर में भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों के बीच इस मुद्दे पर तीखी बहस हुई। विपक्षी सांसदों ने सवाल उठाया कि जब राहुल गांधी को एक किताब के आधार पर बोलने की अनुमति नहीं दी गई, तो फिर भाजपा सांसद को ऐसी किताबों का जिक्र करने की इजाजत कैसे दी गई।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर संसद में किताबों और उनके हवाले से होने वाली राजनीतिक बहस को केंद्र में ला दिया है। बजट सत्र के बीच इस विवाद ने न केवल सदन की कार्यवाही को प्रभावित किया, बल्कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव को भी और गहरा कर दिया।

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