अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और प्रशासन के बीच हुए विवाद ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है। इस मामले में उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि “चोटी नहीं खींचना चाहिए था, यह महापाप है। जिन लोगों ने चोटी को छुआ है, उन्हें पाप लगेगा। कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।”
यह विवाद 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन सामने आया था, जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद संगम में स्नान के लिए जा रहे थे। प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उनके रथ को संगम क्षेत्र में प्रवेश से रोक दिया था। उस समय संगम क्षेत्र में भारी भीड़ और कोहरे की स्थिति बताई गई थी।
प्रशासन का पक्ष
प्रयागराज की मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि शंकराचार्य लगभग 200 अनुयायियों और रथ के साथ संगम पहुंचे थे। भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए उन्हें रथ से उतरकर पैदल जाने का अनुरोध किया गया। इस दौरान अनुयायियों और पुलिस के बीच बहस और धक्का-मुक्की हुई। प्रशासन ने आरोप लगाया कि बैरिकेड्स को नुकसान पहुंचाया गया और स्थिति अनियंत्रित हो सकती थी।
आरोप और प्रत्यारोप
दूसरी ओर, शंकराचार्य पक्ष ने आरोप लगाया कि उनके बटुक ब्राह्मणों के साथ दुर्व्यवहार हुआ और चोटी खींची गई। इस घटना की तस्वीरें भी सार्वजनिक की गईं। मामले के तूल पकड़ने के बाद मेला प्राधिकरण ने शंकराचार्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है कि भविष्य में उन्हें मेले में भाग लेने से क्यों न रोका जाए।
शंकराचार्य का जवाब
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि यह तय करने का अधिकार प्रशासन या किसी संवैधानिक पदाधिकारी को नहीं है कि कौन शंकराचार्य है। उन्होंने दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की और विरोध स्वरूप अपने शिविर के बाहर बैठकर प्रदर्शन किया।
फिलहाल यह मामला धार्मिक और प्रशासनिक मर्यादाओं के बीच संतुलन को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा सर्वोपरि थी, जबकि शंकराचार्य पक्ष इसे धार्मिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बता रहा है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के बाद तय की जाएगी।

