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मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव: अमेरिका की सैन्य तैनाती पर रूस ने दी संयम की सलाह

मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव: अमेरिका की सैन्य तैनाती पर रूस ने दी संयम की सलाह

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच टकराव की आशंका गहराती जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यदि परमाणु वार्ताओं में गतिरोध बना रहा तो अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है। इसी पृष्ठभूमि में रूस ने बड़ा बयान देते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देने की अपील की है।

क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि क्षेत्र में तनाव अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गया है, लेकिन मॉस्को अब भी राजनीतिक और राजनयिक माध्यमों से समाधान की उम्मीद रखता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रूस ईरान के साथ अपने संबंधों को आगे बढ़ाता रहेगा और अपने “ईरानी मित्रों” समेत क्षेत्र के सभी पक्षों से विवेक और संयम बरतने का आग्रह करता है। हाल ही में मॉस्को और तेहरान के बीच हुए संयुक्त नौसैनिक अभ्यास को पेस्कोव ने पहले से तय और योजनाबद्ध बताया।

इस बीच अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि यदि ईरान, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शर्तों को खारिज करता रहा, तो सैन्य अभियान की संभावना बढ़ सकती है। हालांकि ट्रंप ने अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया है और वे अपने सलाहकारों से विभिन्न विकल्पों पर चर्चा कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिमी एशिया में वायु और नौसैनिक संसाधनों की भारी तैनाती के बाद अमेरिकी सेना संभावित हमले के लिए तैयार स्थिति में हो सकती है।

सूत्रों के मुताबिक, हाल के दिनों में अमेरिका ने 50 अतिरिक्त एफ-35, एफ-22 और एफ-16 लड़ाकू विमान क्षेत्र में तैनात किए हैं। इसके अलावा एक और विमानवाहक पोत को रवाना किया गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमान के क्षेत्र में इस समय 12 युद्धपोत सक्रिय हैं और 30,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात बताए जा रहे हैं। यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड के पहुंचने के बाद यह क्षेत्र में तैनात दूसरा अमेरिकी विमानवाहक पोत होगा, जिससे नौसैनिक वायु शक्ति में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।

पूर्व पेंटागन अधिकारी एलेक्स प्लिट्सस ने इस सैन्य जमावड़े को हाल के दशकों में असाधारण बताया है। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि 150 से अधिक सैन्य परिवहन उड़ानों के जरिए हथियार और गोला-बारूद क्षेत्र में पहुंचाए गए हैं। कुछ विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले हफ्तों में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की संभावना 90 प्रतिशत तक आंकी जा रही है।

हालांकि शक्ति प्रदर्शन के बीच व्हाइट हाउस ने दोहराया है कि राष्ट्रपति की पहली प्राथमिकता अब भी कूटनीति है। प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि ईरान के लिए समझौता करना बुद्धिमानी होगी। वहीं उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने संकेत दिया कि वार्ता में कुछ ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर समझौता करना आसान नहीं है। अमेरिका की मुख्य चिंता ईरान का परमाणु कार्यक्रम और उच्च संवर्धित यूरेनियम का भंडार है, जबकि इजरायल ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर खास नजर रखे हुए है।

कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट में सैन्य हलचल और कूटनीतिक बयानबाजी के बीच हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या यह संकट वार्ता की मेज पर सुलझेगा या क्षेत्र एक नए सैन्य टकराव की ओर बढ़ेगा।

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