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अमेरिका में टैरिफ पर संग्राम: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप का ‘प्लान-B’, 10% ग्लोबल टैक्स का ऐलान

अमेरिका में टैरिफ को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ आदेश को अवैध करार दिए जाने के बाद सियासी और आर्थिक हलकों में हलचल मच गई। कोर्ट के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने इसे ‘शर्मनाक’ बताया और कुछ जजों को ‘राष्ट्र के लिए कलंक’ तक कह दिया। खास बात यह रही कि फैसले के कुछ ही घंटों बाद ट्रंप ने अपना ‘प्लान-B’ लागू करने का ऐलान कर दिया।

राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 122 का इस्तेमाल करते हुए 10% ग्लोबल बेस टैरिफ लगाने की घोषणा की है। यह नया टैरिफ पहले से लागू सभी शुल्कों के ऊपर अतिरिक्त रूप से लागू होगा। कानून के मुताबिक, इस प्रावधान के तहत राष्ट्रपति अधिकतम 15% तक टैरिफ लगा सकते हैं, लेकिन इसे बिना संसद की मंजूरी के केवल 150 दिनों के लिए लागू किया जा सकता है। ट्रंप ने कहा कि उनके पास यह अधिकार है और यह नया टैरिफ तीन दिनों के भीतर प्रभावी हो सकता है।

भारत के संदर्भ में ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ‘इंडिया डील’ पूरी तरह सुरक्षित है और इसमें किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘महान और स्मार्ट व्यक्ति’ बताते हुए कहा कि भारत के साथ व्यापार अब पूरी तरह निष्पक्ष और संतुलित है। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि भारत के साथ उनके संबंध बेहद मजबूत हैं और दोनों नेताओं के बीच अच्छी केमिस्ट्री रही है।

ट्रंप ने एक और बड़ा दावा करते हुए कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित परमाणु तनाव को उन्होंने रोका। उनके मुताबिक, उन्होंने कड़ी चेतावनी दी थी कि यदि हालात नहीं सुधरे तो 200 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने उन्हें लाखों जानें बचाने का श्रेय दिया। हालांकि इन दावों पर आधिकारिक स्तर पर कोई स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

सेक्शन 122 अमेरिकी व्यापार कानून का ऐसा प्रावधान है जिसका पहले कभी इस्तेमाल नहीं हुआ था। इसके तहत राष्ट्रपति को व्यापार घाटे को संतुलित करने के लिए सीमित अवधि के लिए टैरिफ लगाने की शक्ति मिलती है और इसके लिए लंबी जांच प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होती। माना जा रहा है कि ट्रंप ने इसे एक ‘ब्रिज मैकेनिज्म’ के रूप में अपनाया है ताकि अदालत के फैसले के बावजूद व्यापार नीति पर नियंत्रण बनाए रखा जा सके।

व्हाइट हाउस में गवर्नर्स के साथ बैठक के दौरान जब ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट के फैसले की जानकारी मिली, तो उन्होंने इसे ‘अपमानजनक’ बताया और तुरंत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने खास तौर पर उन जजों पर नाराजगी जताई जिन्हें उन्होंने स्वयं नियुक्त किया था, लेकिन जिन्होंने उनके टैरिफ आदेश के खिलाफ फैसला दिया।

हालांकि व्यापार जगत के लिए इस घटनाक्रम में एक ‘सिल्वर लाइनिंग’ भी देखी जा रही है। नए कानूनी प्रावधानों के तहत कंपनियों को पहले से नोटिस और प्रक्रिया का समय मिलेगा, जिससे उन्हें अपनी रणनीति तैयार करने का अवसर मिल सकेगा। इसके बावजूद ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि कोई देश अमेरिका के हितों के खिलाफ काम करता है तो उसके साथ व्यापारिक संबंधों की समीक्षा की जा सकती है।

अमेरिका में टैरिफ को लेकर यह ताजा घटनाक्रम वैश्विक व्यापार, भारत-अमेरिका संबंधों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर व्यापक असर डाल सकता है। आने वाले दिनों में इस फैसले के राजनीतिक और आर्थिक प्रभावों पर नजर बनी रहेगी।

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