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CM मान का बड़ा बयान: अकाल तख्त का सम्मान सर्वोपरि, लेकिन राजनीति के लिए न हो इस्तेमाल

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा है कि अकाल तख्त साहिब हर सिख और पंजाबी के लिए सर्वोच्च धार्मिक संस्था है और उसके प्रति सम्मान सभी की जिम्मेदारी है। हालांकि उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग अपने राजनीतिक और निजी हितों के लिए इस पवित्र संस्था का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं। बठिंडा जिले के मंडी कलां गांव में आयोजित ‘लोक मिलनी’ कार्यक्रम के दौरान उन्होंने यह बात कही।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने सिख परंपराओं और धार्मिक आस्था के सम्मान में श्री अकाल तख्त साहिब में मत्था टेका था, लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने यह चिंता पैदा की है कि धार्मिक संस्थाओं को राजनीतिक विवादों में घसीटा जा रहा है। उन्होंने दोहराया कि धार्मिक संस्थाओं की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखना बेहद जरूरी है।

दरअसल, इस महीने की शुरुआत में अकाल तख्त ने सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो को लेकर भगवंत मान को ‘गुरु द्रोही’ और ‘खालसा पंथ विरोधी’ घोषित किया था। वीडियो में कथित तौर पर मुख्यमंत्री जैसा दिखने वाला एक व्यक्ति सिख गुरुओं और जरनैल सिंह भिंडरावाले की तस्वीरों के साथ आपत्तिजनक गतिविधियों में शामिल दिखाई दे रहा था। अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज ने दावा किया था कि वीडियो में किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की गई है और यह एआई से तैयार नहीं किया गया है। वहीं मुख्यमंत्री मान ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे उनकी छवि खराब करने की साजिश बताया।

मुख्यमंत्री ने इस दौरान शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (SGPC) के चुनाव जल्द कराने की मांग भी दोहराई। उन्होंने कहा कि एसजीपीसी के चुनाव करीब 14 वर्षों से नहीं हुए हैं और धार्मिक संस्थाओं का संचालन लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए प्रतिनिधियों के हाथ में होना चाहिए। उनके अनुसार, लंबे समय तक चुनाव न होने से संस्थाओं की जवाबदेही प्रभावित होती है।

भगवंत मान ने शिरोमणि अकाली दल (SAD) और बादल परिवार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व अकाली नेतृत्व ने राजनीतिक लाभ के लिए धर्म का इस्तेमाल किया और राज्य में विभिन्न माफिया तंत्रों को संरक्षण दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब की जनता अब पारदर्शी और जवाबदेह शासन चाहती है।

उन्होंने हाल ही में लागू किए गए ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार एक्ट, 2026’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह कानून धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी के मामलों में सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगा। इस कानून के तहत दोषी पाए जाने पर 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने मंडी कलां गांव के विकास के लिए 50 लाख रुपये की अनुदान राशि देने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि गांव में एक नई लाइब्रेरी बनाई जाएगी और 55 वर्ष पुरानी धर्मशाला का नवीनीकरण कराया जाएगा।

इसके अलावा मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की नई ‘मावां-धीयां सत्कार योजना’ का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 1 जुलाई से शुरू होने वाली इस योजना के तहत 18 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को हर महीने 1,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी, जबकि अनुसूचित जाति परिवारों की महिलाओं को प्रति माह 1,500 रुपये की सहायता प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है।

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