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जौहर यूनिवर्सिटी कार्रवाई पर ओपी राजभर का अखिलेश से सवाल, बोले- बेचैनी क्यों?

लखनऊ/रामपुर में मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी में कथित अवैध निर्माण को लेकर कार्रवाई तेज हो गई है। इसी बीच उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण और उससे जुड़े मामलों को लेकर कई सवाल उठाए और कहा कि कानून अपना काम कर रहा है, ऐसे में विपक्ष को बेचैन होने की जरूरत नहीं है।

ओमप्रकाश राजभर ने अपने बयान में आरोप लगाया कि जौहर यूनिवर्सिटी का निर्माण समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान हुआ और इसमें सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग किया गया। उन्होंने दावा किया कि विश्वविद्यालय के लिए सरकारी जमीन और संसाधनों का इस्तेमाल हुआ, जबकि ट्रस्ट का संचालन आजम खान के हाथ में रहा। राजभर ने यह भी आरोप लगाया कि सरकारी धन से बने संस्थान में नियुक्तियों में पारदर्शिता नहीं बरती गई। उन्होंने कहा कि यदि अवैध निर्माण हुआ है तो उस पर कानून के तहत कार्रवाई होना स्वाभाविक है।

राजभर ने अपने बयान में कहा कि वर्तमान डबल इंजन सरकार अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है और यदि किसी भवन का निर्माण नियमों के विपरीत हुआ है तो उस पर बुलडोजर चलना तय है। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसे मामलों में राजनीतिक बयानबाजी के बजाय आत्ममंथन की जरूरत है।

उधर, रामपुर विकास प्राधिकरण की जांच में सामने आया है कि मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी परिसर के अधिकांश भवनों का निर्माण बिना स्वीकृत नक्शे के किया गया। जांच के अनुसार, विश्वविद्यालय परिसर में कुल 40 भवन हैं, जिनमें से केवल दो भवनों के नक्शे स्वीकृत पाए गए, जबकि शेष 38 भवनों का निर्माण कथित रूप से बिना आवश्यक अनुमति के किया गया है। इस मामले में विश्वविद्यालय प्रबंधन को पहले नोटिस जारी किया गया था।

सुनवाई के बाद रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने विश्वविद्यालय प्रबंधन की दलीलों को खारिज करते हुए निर्देश दिया है कि प्रबंधन 15 दिनों के भीतर स्वयं अवैध निर्माण हटा ले। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्रवाई नहीं होने पर संबंधित अवैध भवनों को नियमानुसार ध्वस्त किया जाएगा। फिलहाल यह मामला प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ राजनीतिक बयानबाजी का भी केंद्र बना हुआ है।

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