पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में राजनीति उस समय गरमा गई, जब फुलझोड़ डांगापाड़ा इलाके में बना भाजपा का अस्थायी टेंट कार्यालय रातों-रात गायब हो गया। यह कार्यालय बांस और तिरपाल से तैयार किया गया था और स्थानीय स्तर पर पार्टी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। रविवार सुबह जब भाजपा कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे, तो वहां कार्यालय का कोई नामोनिशान नहीं मिला। जमीन पर केवल पार्टी के झंडे बिखरे पड़े थे, जबकि पूरा ढांचा गायब था।
इस घटना को लेकर भाजपा ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि अंधेरे का फायदा उठाकर तृणमूल समर्थित लोगों ने कार्यालय को तोड़ा और बांस, तिरपाल समेत अन्य सामान चोरी कर ले गए। सूचना मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी।
भाजपा के मंडल अध्यक्ष बुद्धदेव मंडल ने बताया कि यह अस्थायी कार्यालय एसआईआर (SIR) से जुड़े कार्यों में आम लोगों की मदद के लिए बनाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि यह हमला सुनियोजित था और राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश है। बुद्धदेव मंडल ने चेतावनी दी कि अगर प्रशासन ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की, तो पार्टी बड़े स्तर पर आंदोलन करेगी।
घटना के विरोध में रविवार को भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। कार्यकर्ता हाथों में झंडे और पोस्टर लेकर सड़क पर उतरे और प्रशासन से न्याय की मांग की। प्रदर्शन के दौरान क्षेत्र में कुछ समय के लिए तनाव का माहौल भी देखा गया।
वहीं दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। तृणमूल के पूर्व पार्षद दीपांकर लाहा ने कहा कि उन्हें ऐसे किसी कार्यालय की जानकारी ही नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा 2026 के चुनाव को देखते हुए माहौल गर्म करने की कोशिश कर रही है और यह घटना पार्टी की आंतरिक गुटबाजी का नतीजा है, जिसे तृणमूल के सिर मढ़ा जा रहा है।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कार्यालय वास्तव में कैसे और किन परिस्थितियों में गायब हुआ। इस घटना ने एक बार फिर दुर्गापुर की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज कर दिया है।

