खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह की संसद के बजट सत्र में भाग लेने के लिए अस्थायी रिहाई (पैरोल) की मांग पर बुधवार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने की। अदालत ने फिलहाल अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए पंजाब सरकार को 10 दिनों के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि लोकसभा की कार्यवाही में किसी सांसद के वर्चुअल माध्यम से शामिल होने का कोई प्रावधान नहीं है। लोकसभा अध्यक्ष की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सालिसिटर जनरल सत्य पाल जैन ने कोर्ट को अवगत कराया कि संसदीय नियमों के तहत सांसद की शारीरिक उपस्थिति आवश्यक होती है, विशेषकर मतदान जैसी संवैधानिक प्रक्रियाओं में, जहां उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है।
खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि इस चरण पर अंतरिम राहत देना याचिका के अंतिम निस्तारण के समान होगा, इसलिए फिलहाल ऐसा आदेश पारित नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी पूछा था कि क्या अदालतों की तरह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किसी निरुद्ध सांसद को सदन की कार्यवाही में भाग लेने की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन संसदीय नियमों में ऐसी व्यवस्था नहीं होने की बात स्पष्ट की गई।
सुनवाई के दौरान यह भी रिकॉर्ड पर रखा गया कि लोकसभा सचिवालय द्वारा 9 फरवरी को भेजे गए पत्र के अनुसार, अमृतपाल सिंह की अनुपस्थिति अब तक 37 दिनों की हो चुकी है। नियमों के मुताबिक, कोई भी निरुद्ध सांसद सक्षम अदालत की अनुमति के बिना सदन की बैठकों में शामिल नहीं हो सकता।
गौरतलब है कि अमृतपाल सिंह वर्तमान में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत निरुद्ध हैं। उन्होंने अपनी याचिका में पंजाब सरकार के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें संसद के बजट सत्र में भाग लेने के लिए उनकी अस्थायी रिहाई की मांग खारिज कर दी गई थी। याचिका में उन्होंने कहा है कि वह अपने निर्वाचन क्षेत्र के लगभग 19 लाख मतदाताओं का प्रतिनिधित्व करना चाहते हैं और अगस्त 2025 की बाढ़ से प्रभावित गांवों, नशे की समस्या तथा विकास संबंधी मुद्दों को संसद में उठाना चाहते हैं।
अब मामले की अगली सुनवाई पंजाब सरकार के विस्तृत जवाब के बाद होगी, जिस पर अदालत आगे का निर्णय लेगी।

