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असम में डेमोग्राफी पर अमित शाह का कांग्रेस पर हमला, बोले- जिम्मेदार कौन?

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने असम में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए राज्य के विकास, घुसपैठ और जनसांख्यिकीय बदलाव जैसे मुद्दों पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने असम में लगभग 15 लाख करोड़ रुपये के विकास कार्य कराए हैं और अगले पांच वर्षों में असम को पूर्वोत्तर भारत का इंडस्ट्रियल हब बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

अपने संबोधन में अमित शाह ने घुसपैठ के मुद्दे को देश की सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा कि जिस तरह देश का बड़ा हिस्सा नक्सलवाद से मुक्त हुआ है, उसी तरह देश की जमीन को घुसपैठियों से भी मुक्त कराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए दृढ़ इच्छाशक्ति, साहस और स्पष्ट नीयत की जरूरत होती है, जो प्रधानमंत्री मोदी के पास है।

अमित शाह ने असम में जनसांख्यिकीय बदलाव के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासन के दौरान घुसपैठ को बढ़ावा मिला, जिससे राज्य के कई जिलों की डेमोग्राफी प्रभावित हुई। शाह ने सवाल उठाते हुए कहा कि धुबरी, बारपेटा, मोरीगांव, नागांव और गोलपारा जैसे जिले मुस्लिम-बहुल कैसे बन गए और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। उन्होंने दावा किया कि केवल भारतीय जनता पार्टी (BJP) ही असम को इस स्थिति से बाहर निकाल सकती है।

जनसभा के अलावा अमित शाह ने सीआरपीएफ दिवस परेड को भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में सीआरपीएफ ने आतंकवाद और पत्थरबाजी की घटनाओं को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और अब वहां पत्थरबाजी की घटनाएं लगभग शून्य हो गई हैं। उन्होंने मणिपुर में जातीय हिंसा से निपटने और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कार्रवाई के लिए भी सीआरपीएफ की सराहना की।

अमित शाह ने भरोसा जताते हुए कहा कि 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सल समस्या का पूरी तरह सफाया कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी और कठिन परिस्थितियों में सीआरपीएफ के जवानों ने नक्सलियों के गढ़ को ध्वस्त कर देश की सुरक्षा मजबूत की है।

उन्होंने यह भी कहा कि एक दशक पहले देश में तीन बड़े हॉटस्पॉट थे—जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद, पूर्वोत्तर में उग्रवाद और नक्सल प्रभावित क्षेत्र। लेकिन अब ये क्षेत्र शांति और विकास की राह पर आगे बढ़ रहे हैं और देश की प्रगति में योगदान दे रहे हैं। अमित शाह के इस बयान के बाद असम की राजनीति में जनसांख्यिकीय बदलाव और घुसपैठ का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है।

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