ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के सबसे अहम मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पिछले 24 घंटे से पूरी तरह ठहराव की स्थिति बनी हुई थी, जहां ईरान ने किसी भी जहाज को गुजरने की अनुमति नहीं दी। इसी बीच भारत की कूटनीतिक कोशिशों का असर दिखा है और ईरान ने भारतीय झंडे वाले दो एलपीजी टैंकरों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति दे दी है।
सूत्रों के अनुसार, ये दोनों टैंकर जल्द ही अपनी यात्रा शुरू कर सकते हैं। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ईरान ने खाड़ी क्षेत्र से निकलने वाले जहाजों पर हमले की चेतावनी दे रखी है, जिसके चलते सैकड़ों जहाज बीच समुद्र में ही रुके हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसका असर साफ दिख रहा है और तेल-गैस की कीमतों में तेजी आई है। ऐसे माहौल में भारत के जहाजों को मिली अनुमति को बड़ी कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है।
शिपिंग डेटा के मुताबिक, भारतीय एलपीजी टैंकर ‘पाइन गैस’ और ‘जग वसंत’ इस समय संयुक्त अरब अमीरात के शारजाह के पास खाड़ी में लंगर डाले हुए हैं और यात्रा की तैयारी कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि इन टैंकरों को क्रमशः BPCL (भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड) और IOC (इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन) ने किराए पर लिया है। उम्मीद है कि ये टैंकर जल्द ही होर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत के लिए रवाना होंगे।
जानकारों के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस का कारोबार होता है, ऐसे में इस मार्ग का बंद होना वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डालता है। भारत सरकार लगातार इस स्थिति पर नजर बनाए हुए है और खाड़ी में मौजूद अपने जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक स्तर पर बातचीत कर रही है।
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी साफ किया है कि सरकार खाड़ी क्षेत्र में मौजूद भारतीय जहाजों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बातचीत कर रहे हैं ताकि भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता मिल सके।
कुल मिलाकर, तनावपूर्ण हालात के बीच भारतीय टैंकरों को मिली यह अनुमति न सिर्फ देश के लिए राहत की खबर है, बल्कि यह भारत की मजबूत कूटनीति और वैश्विक स्तर पर बढ़ते प्रभाव को भी दर्शाती है।

