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पीएम मोदी की अपील का असर, कई मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों ने छोटा किया काफिला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचाने और खर्चों में कटौती की अपील का असर अब देशभर में दिखाई देने लगा है। पीएम मोदी द्वारा पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, विदेश यात्राएं टालने और जरूरत पड़ने पर वर्क फ्रॉम होम अपनाने की सलाह के बाद कई राज्यों के मुख्यमंत्री और बड़े नेताओं ने अपने काफिलों में वाहनों की संख्या घटानी शुरू कर दी है। इतना ही नहीं, कई राज्यों में सरकारी बैठकों को वर्चुअल मोड में आयोजित करने और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने जैसे फैसले भी लिए जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने खुद इस पहल की शुरुआत करते हुए अपने काफिले में गाड़ियों की संख्या लगभग 50 फीसदी तक कम करने का निर्देश दिया है। साथ ही उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल पर भी जोर दिया है। हालांकि सुरक्षा एजेंसी SPG ने स्पष्ट किया है कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा से जुड़े प्रोटोकॉल में किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। हाल ही में वडोदरा और गुवाहाटी दौरे के दौरान पीएम मोदी के छोटे काफिले ने लोगों का ध्यान खींचा।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी अपने काफिले को छोटा कर दिया है। उनके हालिया दौरों में पहले की तुलना में काफी कम वाहन दिखाई दिए। बीजेपी शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्रियों ने भी पीएम मोदी की अपील पर अमल शुरू कर दिया है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने और मंत्रियों के काफिले में 50 फीसदी कटौती के आदेश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों के साथ बैठक में कहा कि अनावश्यक वाहनों को हटाया जाए और अधिक से अधिक सरकारी बैठकें वर्चुअल माध्यम से आयोजित की जाएं। इसके अलावा उन्होंने सप्ताह में एक दिन ‘नो व्हीकल डे’ मनाने, सार्वजनिक परिवहन, कार पूलिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं। योगी ने स्कूलों और कॉलेजों में भी बसों के उपयोग को प्रोत्साहित करने की बात कही।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विभागीय कार्यों के लिए वाहनों की संख्या सीमित करने का फैसला लिया है। वहीं दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा, आशीष सूद और कपिल मिश्रा ने भी अपने काफिले छोटे कर दिए हैं। कुछ मंत्री मेट्रो और ई-रिक्शा से यात्रा करते हुए भी नजर आए। मंत्री आशीष सूद ने इलेक्ट्रिक कार के इस्तेमाल का फैसला लिया है, जबकि कपिल मिश्रा ने कहा कि जरूरत न होने पर वह सार्वजनिक परिवहन का ही इस्तेमाल करेंगे।

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और हरियाणा के मुख्यमंत्री ने भी अपने काफिले में वाहनों की संख्या कम कर दी है। राजस्थान के सीएम ने कहा कि गैर-जरूरी कार्यक्रमों को छोटा किया जाएगा या रद्द किया जाएगा ताकि ईंधन की बचत हो सके।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी कई बड़े फैसले लिए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कारकेड में गाड़ियों की संख्या घटाई जाएगी और मंत्रियों, अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों से अतिरिक्त वाहनों से बचने की अपील की गई है। राज्य सरकार ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठकों को बढ़ावा देने और सप्ताह में एक दिन ‘नो व्हीकल डे’ मनाने का सुझाव भी दिया है।

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल का काफिला भी पहले की तुलना में काफी छोटा दिखाई दिया। अमरेली से गांधीनगर लौटते समय उनके काफिले में केवल तीन गाड़ियां नजर आईं। इसी तरह मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी मंत्रियों और अधिकारियों के काफिलों में कटौती के आदेश दिए हैं। उन्होंने साफ कहा कि सड़क पर वाहन रैली और ट्रैफिक जाम जैसी स्थितियों से बचा जाए।

महाराष्ट्र में भी देवेंद्र फडणवीस सरकार ने विदेश यात्राओं पर नियंत्रण और वर्चुअल बैठकों को प्राथमिकता देने के निर्देश जारी किए हैं। वहीं विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने भी अपने काफिले की दो गाड़ियां कम कर दी हैं और जापान दौरा रद्द कर दिया है।

प्रधानमंत्री मोदी की इस अपील के बाद देशभर में ईंधन बचत और सार्वजनिक संसाधनों के सीमित उपयोग को लेकर एक नई मुहिम शुरू होती दिखाई दे रही है। कई राज्यों की सरकारें अब इसे प्रशासनिक सुधार और संसाधन बचत के बड़े अभियान के तौर पर आगे बढ़ा रही हैं।

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