देशभर में बढ़ते आवारा कुत्तों के हमलों और रेबीज के मामलों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सार्वजनिक स्थानों से स्ट्रे डॉग्स को हटाने के अपने पुराने आदेश को बरकरार रखा है। कोर्ट ने साफ कहा कि लोगों की सुरक्षा और पब्लिक हेल्थ सबसे बड़ी प्राथमिकता है और इस मामले में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जा सकती। इसके साथ ही अदालत ने एनिमल वेलफेयर बोर्ड और डॉग लवर्स की ओर से दायर सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है।
जस्टिस विक्रमनाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने कहा कि 2025 में दिया गया आदेश पूरी तरह लागू रहेगा। कोर्ट ने माना कि देशभर में आवारा कुत्तों के हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और रेबीज की वजह से कई लोगों की जान जा चुकी है। ऐसे में राज्यों और स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वे लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और एनिमल बर्थ कंट्रोल नियमों का सख्ती से पालन करें।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सड़कों, स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशन, बस अड्डों और खेल मैदानों जैसे सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तों की मौजूदगी गंभीर चिंता का विषय है। अदालत ने यह भी दोहराया कि पकड़े गए कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण के बाद दोबारा उसी इलाके में नहीं छोड़ा जाएगा। कोर्ट ने कहा कि बच्चों और आम लोगों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता।
गौरतलब है कि अगस्त 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों को निर्देश दिया था कि आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर होम भेजा जाए। साथ ही चेतावनी दी गई थी कि इस प्रक्रिया में बाधा डालने वालों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई हो सकती है। इसके बाद नवंबर 2025 में कोर्ट ने स्कूलों, अस्पतालों और अन्य संवेदनशील स्थानों के आसपास से स्ट्रे डॉग्स हटाने का आदेश भी जारी किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि शिक्षण संस्थानों और अस्पतालों के आसपास उचित बाउंड्री बनाई जाए ताकि आवारा कुत्ते परिसर में प्रवेश न कर सकें। अदालत ने इस पूरे मामले का स्वतः संज्ञान बच्चों पर बढ़ते कुत्तों के हमलों और रेबीज के मामलों को देखते हुए लिया था।
इस मामले में कोर्ट ने 29 जनवरी को सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने कुत्तों के साथ क्रूरता न करने और मानवीय तरीके से नसबंदी अभियान चलाने की मांग की थी, जबकि कई याचिकाकर्ताओं ने आम लोगों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही थी।
अब सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद राज्यों और नगर निकायों पर सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने और उन्हें शेल्टर होम में रखने की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। अदालत का यह फैसला आने वाले समय में देशभर में स्ट्रे डॉग्स से जुड़ी नीतियों और व्यवस्थाओं की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।

