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अब होर्मुज बंद होने का नहीं होगा असर! UAE बना रहा भारत के लिए नया तेल रास्ता

खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बने संकट के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहतभरी खबर सामने आई है। संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE ने ऐसा कदम उठाया है, जिससे भविष्य में भारत की तेल सप्लाई पर किसी भी भू-राजनीतिक संकट का असर काफी हद तक कम हो सकता है। यूएई की सरकारी तेल कंपनी ADNOC ने खुलासा किया है कि वह एक बड़े पाइपलाइन प्रोजेक्ट पर तेजी से काम कर रही है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बाईपास करेगा। कंपनी के मुताबिक इस परियोजना का 50 फीसदी से ज्यादा काम पूरा हो चुका है और इसे साल 2027 तक शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।

दरअसल, मौजूदा समय में ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर संकट गहरा गया है। यही वह समुद्री रास्ता है जहां से खाड़ी देशों का अधिकांश कच्चा तेल भारत समेत दुनिया के कई देशों तक पहुंचता है। इस मार्ग पर किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ता है। ऐसे माहौल में यूएई का यह नया कदम भारत के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

यूएई का यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ‘वेस्ट-ईस्ट पाइपलाइन प्रोजेक्ट’ के नाम से जाना जा रहा है। ADNOC के सीईओ सुल्तान अल जाबेर ने एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में बताया कि यह पाइपलाइन यूएई के अंदरूनी तेल क्षेत्रों को सीधे फुजैरा पोर्ट से जोड़ेगी। खास बात यह है कि फुजैरा पोर्ट ओमान की खाड़ी के किनारे स्थित है और यह होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर आता है। इसका मतलब यह होगा कि तेल को जहाजों के जरिए खतरनाक होर्मुज मार्ग से गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

इस नई व्यवस्था के तहत तेल पहले जमीन के रास्ते पाइपलाइन से फुजैरा पोर्ट तक पहुंचेगा और वहां से सीधे भारतीय जहाजों में लोड होकर भारत भेजा जाएगा। इससे न केवल सप्लाई अधिक सुरक्षित होगी बल्कि वैश्विक तनाव के बावजूद तेल की उपलब्धता भी बनी रहेगी। यूएई सरकार ने इस परियोजना को प्राथमिकता देते हुए इसे तय समय से पहले पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

ADNOC के अधिकारियों के मुताबिक दुनिया की बड़ी ऊर्जा सप्लाई अभी भी ऐसे ‘चोक पॉइंट्स’ पर निर्भर है, जहां किसी भी सैन्य या राजनीतिक तनाव का असर तुरंत दिखाई देता है। यही वजह है कि यूएई ने कई साल पहले ही होर्मुज को बाईपास करने की योजना पर काम शुरू कर दिया था। कंपनी ने यह भी स्वीकार किया कि हालिया संघर्ष के दौरान उसके कुछ ऊर्जा प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचा है, लेकिन तेल निर्यात को जारी रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था मजबूत की जा रही है।

भारत के लिए यह परियोजना बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि देश अपनी कुल जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। यदि यूएई से तेल की सप्लाई बिना किसी बाधा के जारी रहती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। इसका सीधा फायदा भारतीय उपभोक्ताओं को पेट्रोल-डीजल की कीमतों और महंगाई में राहत के रूप में मिल सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना सिर्फ ऊर्जा सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत और यूएई के बीच मजबूत होते रणनीतिक और आर्थिक रिश्तों का भी संकेत है। आने वाले समय में यह पाइपलाइन भारत के लिए एक बड़े सुरक्षा कवच की तरह काम कर सकती है, जिससे वैश्विक संकट के बावजूद देश की ऊर्जा जरूरतों को स्थिर बनाए रखने में मदद मिलेगी।

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