लोकसभा में छात्रों पर कथित लाठीचार्ज और छात्राओं के साथ कथित दुर्व्यवहार का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, “क्या बेटियों के कपड़े फाड़ेंगे आप?” उनके इस सवाल के बाद सदन में कुछ देर के लिए सन्नाटा छा गया और सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
अखिलेश यादव ने अपने संबोधन में आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ सख्ती बरती गई और छात्राओं के साथ भी अनुचित व्यवहार हुआ। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखना हर नागरिक का अधिकार है और छात्रों की आवाज को बल प्रयोग से दबाने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
सपा प्रमुख ने अपने भाषण के दौरान सरकार से कई सवाल भी पूछे। उन्होंने कहा कि यदि युवा अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरते हैं, तो सरकार का दायित्व उनकी बात सुनना है, न कि उनके खिलाफ लाठीचार्ज करना। उन्होंने छात्रों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
वहीं, सत्ता पक्ष ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने आवश्यक कदम उठाए। सरकार की ओर से कहा गया कि किसी भी तरह की घटना की जांच तथ्यों के आधार पर की जाएगी और विपक्ष बिना पूरी जानकारी के राजनीतिक आरोप लगा रहा है।
छात्रों के मुद्दे पर लोकसभा में हुई इस तीखी बहस के बाद मामला राजनीतिक रूप से और गरमा गया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार इस पूरे विवाद पर क्या आधिकारिक कदम उठाती है और क्या छात्रों की मांगों तथा विपक्ष के आरोपों पर कोई विस्तृत जवाब देती है।
