आजकल बड़ी संख्या में लोग एसिडिटी, गैस और सीने में जलन की समस्या से जूझ रहे हैं। आमतौर पर इसे ज्यादा मिर्च-मसाले या अधिक खाना खाने से जोड़ दिया जाता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि हर बार वजह यही नहीं होती। अगर कोई व्यक्ति कम खाना खाने के बावजूद रोज एसिडिटी की शिकायत कर रहा है, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। कई मामलों में इसके पीछे लो स्टमक एसिड यानी पेट में बनने वाले हाइड्रोक्लोरिक एसिड की कमी भी एक अहम कारण हो सकता है।
आरएमएल हॉस्पिटल के मेडिसिन विभाग के डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. सुभाष गिरि के अनुसार, पेट में बनने वाला एसिड भोजन को तोड़ने, खासकर प्रोटीन को पचाने और जरूरी पोषक तत्वों को अवशोषित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब यह एसिड सामान्य से कम बनने लगता है, तो पाचन प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है। अधपचा भोजन पेट में अधिक समय तक ठहरता है, जिससे गैस बनती है और पेट में दबाव बढ़ता है। इसी दबाव के कारण पेट की सामग्री और एसिड ऊपर अन्ननली की ओर आ सकते हैं, जिससे सीने में जलन, खट्टी डकार और गले में जलन जैसी शिकायतें होती हैं।
डॉ. गिरि बताते हैं कि कई बार लोगों को लगता है कि उनके पेट में अत्यधिक एसिड बन रहा है, जबकि असल में समस्या एसिड की कमी से जुड़ी होती है। लंबे समय तक लो स्टमक एसिड की स्थिति रहने पर भारीपन, पेट में असहजता और बार-बार डकार आना आम हो जाता है। इसलिए बार-बार एंटासिड लेने के बजाय सही कारण की पहचान जरूरी है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, उम्र बढ़ने, लंबे समय तक एंटासिड दवाओं के सेवन, अत्यधिक तनाव, पोषण की कमी, खासकर जिंक और विटामिन बी12 की कमी, तथा अनियमित खानपान के कारण भी पेट का एसिड स्तर कम हो सकता है। इसके अलावा अनियमित समय पर भोजन करना, बहुत ज्यादा चाय-कॉफी या कार्बोनेटेड ड्रिंक का सेवन, तला-भुना और प्रोसेस्ड फूड, देर रात तक जागना, धूम्रपान और शराब का सेवन भी एसिडिटी की समस्या को बढ़ा सकते हैं। कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट और हार्मोनल बदलाव भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।
एसिडिटी से बचाव के लिए नियमित और संतुलित आहार बेहद जरूरी है। एक साथ ज्यादा भोजन करने के बजाय थोड़ी-थोड़ी मात्रा में दिन में कई बार खाना बेहतर होता है। अत्यधिक मसालेदार और तला-भुना भोजन सीमित करें। खाने के तुरंत बाद लेटने से बचें और कम से कम 30 मिनट तक हल्की वॉक करें। पर्याप्त पानी पीना और तनाव कम करने के लिए योग व ध्यान अपनाना भी फायदेमंद हो सकता है।
अगर एसिडिटी की समस्या बार-बार हो रही है या लंबे समय तक बनी रहती है, तो स्वयं दवा लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेकर जरूरी जांच कराना ही समझदारी है। सही कारण की पहचान ही स्थायी समाधान की दिशा में पहला कदम है।

