पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को बड़ा झटका देते हुए सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित महंगाई भत्ते (DA) के भुगतान पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने राज्य सरकार की समीक्षा याचिका खारिज करते हुए साफ कहा कि महंगाई भत्ता कर्मचारियों का कानूनी अधिकार है और इसे वित्तीय संकट का हवाला देकर टाला नहीं जा सकता। अदालत के इस फैसले से राज्य के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ी राहत मिली है।
दरअसल, पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें सरकार को 30 जून 2026 तक सभी लंबित डीए एरियर का भुगतान करने के निर्देश दिए गए थे। सरकार ने डबल बेंच में अपील दाखिल कर फैसले पर रोक लगाने की मांग की थी, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि वह तय समय सीमा के भीतर एरियर भुगतान की विस्तृत योजना पेश करे।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि महंगाई भत्ता और महंगाई राहत (DR) किसी प्रकार की सरकारी कृपा नहीं है, बल्कि कर्मचारियों और पेंशनरों का वैधानिक अधिकार है। अदालत ने कहा कि समान परिस्थितियों में कार्यरत कर्मचारियों के बीच भेदभाव नहीं किया जा सकता और सभी को समान डीए मिलना चाहिए।
कोर्ट ने पंजाब सरकार को 25 मई तक विस्तृत रोडमैप पेश करने के निर्देश भी दिए हैं। अदालत ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में भुगतान करना चाहती है तो उसे ठोस योजना के साथ सामने आना होगा। केवल यह कहना कि राज्य वित्तीय संकट से गुजर रहा है, पर्याप्त नहीं माना जा सकता। इस दौरान अदालत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर पंजाब की आर्थिक स्थिति इतनी खराब है तो फिर राज्य में वित्तीय आपातकाल घोषित क्यों नहीं किया जाता।
सरकार की ओर से अदालत में दलील दी गई कि वह कर्मचारियों और पेंशनरों को डीए का भुगतान करने के खिलाफ नहीं है, लेकिन फिलहाल राज्य की आर्थिक स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। हालांकि हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और कहा कि कर्मचारियों के वैधानिक अधिकारों को लंबे समय तक रोका नहीं जा सकता।
गौरतलब है कि इससे पहले 8 अप्रैल को हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने पंजाब के सभी सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों को आईएएस, आईपीएस, आईएफएस और न्यायिक अधिकारियों के समान 58 प्रतिशत डीए देने के आदेश जारी किए थे। अदालत ने तब भी कहा था कि डीए के मामले में अलग-अलग वर्गों के कर्मचारियों के बीच भेदभाव नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट के इस फैसले को पंजाब सरकार के लिए बड़ा कानूनी और प्रशासनिक झटका माना जा रहा है। साथ ही यह फैसला राज्य के लाखों कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए राहत लेकर आया है, जो लंबे समय से अपने बकाया डीए एरियर का इंतजार कर रहे थे।

