राजस्थान के जैसलमेर में स्थित बड़ाबाग डंपिंग यार्ड एक बार फिर विवादों में आ गया है। इस बार मामला डंपिंग यार्ड में खुले में पड़े मृत गोवंश के शवों का है, जिसने स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो के बाद नगर परिषद प्रशासन भी हरकत में आया और मृत पशुओं के निस्तारण का जिम्मा संभाल रहे ठेकेदार को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
जैसलमेर शहर से करीब 5 किलोमीटर दूर स्थित बड़ाबाग डंपिंग यार्ड पहले भी विवादों का केंद्र रहा है। आबादी क्षेत्र के पास डंपिंग यार्ड बनाए जाने को लेकर ग्रामीण लंबे समय से विरोध करते रहे हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान भी ग्रामीणों ने इस मुद्दे पर मतदान का बहिष्कार किया था। बाद में जनप्रतिनिधियों के आश्वासन के बाद लोगों ने मतदान किया, लेकिन चुनाव के बाद यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया। अब दो साल बाद यह डंपिंग यार्ड एक बार फिर चर्चा में है।
मामले ने तब तूल पकड़ा जब श्री करनी गौ रक्षा सेवा दल के अध्यक्ष हाकम दान ने डंपिंग यार्ड में खुले में पड़े मृत गोवंश के शवों का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। वीडियो में बड़ी संख्या में गोवंश के शव अस्त-व्यस्त हालत में दिखाई दे रहे थे। इसके बाद लोगों में नाराजगी बढ़ गई और नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि एक ओर गोसंरक्षण और स्वच्छता को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर मृत गोवंश के सम्मानजनक निस्तारण तक की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। भीषण गर्मी में खुले में पड़े शवों से दुर्गंध फैल रही थी और संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ गया था। लोगों ने इसे प्रशासनिक लापरवाही और संवेदनहीनता करार दिया है।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद नगर परिषद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया। परिषद आयुक्त लजपालसिंह सोढ़ा की ओर से मृत पशुओं के उठाव और निस्तारण का काम देख रहे ठेकेदार को नोटिस जारी किया गया। नोटिस में कहा गया कि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार मृत पशुओं का वैज्ञानिक और समयबद्ध तरीके से निस्तारण किया जाना चाहिए था, लेकिन इसमें गंभीर अनियमितता सामने आई है।
नगर परिषद की कार्रवाई के बाद ठेकेदार ने जल्दबाजी में डंपिंग यार्ड में पड़े शवों को हटाने और डिस्पोजल की प्रक्रिया शुरू कर दी। परिषद आयुक्त ने कहा कि कुछ घंटों में पूरे क्षेत्र की सफाई कर दी जाएगी। हालांकि लोगों का सवाल है कि यदि यह मामला सामने नहीं आता, तो क्या प्रशासन इसी तरह लापरवाह बना रहता।
जानकारी के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए मृत पशुओं को उठाने, चमड़ा और हड्डियों के निस्तारण का ठेका बाड़मेर निवासी गोपाराम को लगभग 18 लाख रुपये में दिया गया था। नगर परिषद ने पहले ही निर्देश दिए थे कि मृत पशुओं को डंपिंग यार्ड में गड्ढा खोदकर दबाया जाए, लेकिन नियमों की अनदेखी की गई।
इस पूरे मामले ने नगर परिषद की निगरानी व्यवस्था और सफाई तंत्र की पोल खोल दी है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस व्यवस्था बनाई जाए।

