भारतीय जनता पार्टी ने केरल की राजनीति में एक ऐसा फैसला लिया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है। पार्टी ने विधानसभा में अपने विधायी दल का नेता ऐसे चेहरे को बनाया है, जो लंबे समय तक सुर्खियों से दूर रहे। बीजेपी ने दिग्गज नेताओं और पूर्व केंद्रीय मंत्रियों को पीछे छोड़ते हुए बी.बी. गोपाकुमार को यह अहम जिम्मेदारी सौंपी है। खास बात यह है कि गोपाकुमार कभी कांग्रेस से जुड़े रहे और बाद में बीजेपी के ‘मिस्ड कॉल सदस्यता अभियान’ के जरिए पार्टी में शामिल हुए थे।
केरल विधानसभा चुनाव में बीजेपी को तीन सीटों पर जीत मिली थी। इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर और वी. मुरलीधरन जैसे बड़े नाम शामिल थे। इसके बावजूद पार्टी ने कम चर्चित विधायक बी.बी. गोपाकुमार को विधायी दल का नेता बनाकर सभी को चौंका दिया। विधानसभा सत्र शुरू होने से ठीक पहले पार्टी ने यह फैसला लिया, जिसके बाद राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे बीजेपी की नई रणनीति के तौर पर देखा।
विधायी दल का नेता चुने जाने के बाद गोपाकुमार ने कहा कि यह फैसला उनके लिए भी अप्रत्याशित था। उन्होंने बताया कि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने उन्हें इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विधानसभा में वह बीजेपी की मजबूत आवाज बनकर काम करेंगे और पार्टी की नीतियों को प्रभावी तरीके से जनता के सामने रखेंगे।
बी.बी. गोपाकुमार पेशे से शिक्षक रहे हैं और स्कूल के हेडमास्टर पद से रिटायर हुए हैं। राजनीति में आने से पहले वह कांग्रेस के कार्यकर्ता थे। बाद में वह बीजेपी के ‘मिस्ड कॉल सदस्यता अभियान’ के जरिए पार्टी में शामिल हुए। धीरे-धीरे उन्होंने संगठन में अपनी मजबूत पहचान बनाई और जमीनी स्तर पर लगातार काम करते रहे। अपने क्षेत्र में वह हिंदू एझवा समुदाय के बीच एक लोकप्रिय चेहरा माने जाते हैं।
हालिया विधानसभा चुनाव में गोपाकुमार ने चथन्नूर सीट से जीत दर्ज की, जिसे लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। इस सीट पर साल 2006 से लगातार CPI का कब्जा था। लेकिन बीजेपी और आरएसएस कार्यकर्ताओं की लंबे समय तक चली रणनीतिक मेहनत के बाद गोपाकुमार ने यहां बड़ी जीत हासिल की। उन्होंने CPI उम्मीदवार आर. राजेंद्रन को हराकर पार्टी को ऐतिहासिक सफलता दिलाई।
गोपाकुमार इससे पहले भी दो बार चथन्नूर सीट से चुनाव लड़ चुके थे। साल 2016 में उन्हें करीब 25 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि 2021 में उन्होंने पार्टी का वोट शेयर बढ़ाकर 30 प्रतिशत से अधिक कर दिया। हालांकि दोनों चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इसके बावजूद उन्होंने क्षेत्र में लगातार काम जारी रखा। आखिरकार 2026 के चुनाव में उन्हें जीत मिली और उन्होंने 38 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल किए।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी ने गोपाकुमार को आगे कर यह संदेश देने की कोशिश की है कि पार्टी अब केवल बड़े चेहरों पर निर्भर नहीं रहना चाहती, बल्कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले नेताओं को भी मौका दे रही है। गोपाकुमार की जीत और उन्हें मिली नई जिम्मेदारी को बीजेपी के संगठनात्मक मॉडल और केरल में पार्टी के विस्तार की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
गोपाकुमार ने अपनी जीत को “चथन्नूर मॉडल” बताया है। उनका कहना है कि जिस तरह पार्टी ने इस सीट पर संगठन और जनता के बीच लगातार काम करके सफलता हासिल की, उसी मॉडल को केरल की दूसरी सीटों पर भी लागू किया जा सकता है। बीजेपी को उम्मीद है कि यह फैसला राज्य में पार्टी की राजनीतिक स्थिति को और मजबूत करेगा।

