उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले से पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर एक विवादित मामला सामने आया है। जिले के कंधई थाना क्षेत्र के परानपुर गांव में एक महिला को थप्पड़ मारने का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में दावा किया जा रहा है कि महिला अपनी गोद में दुधमुंहे बच्चे को लिए हुए थी, तभी मौके पर मौजूद थाना प्रभारी ने उसे थप्पड़ मार दिया। घटना के बाद पुलिस की कार्रवाई और नियमों के पालन को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार, परानपुर गांव में एक विवादित यूकेलिप्टस (सफेदा) के पेड़ को लेकर दो पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। हाल ही में आई आंधी के दौरान पेड़ गिर गया था, जिससे गांव का रास्ता बाधित हो गया। पेड़ के स्वामित्व को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने थे। विवाद को सुलझाने और रास्ता खुलवाने के लिए कंधई थाना प्रभारी आदित्य सिंह पुलिस बल, महिला पुलिसकर्मियों और राजस्व विभाग की टीम के साथ मौके पर पहुंचे थे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, राजस्व अधिकारियों की मौजूदगी में पेड़ को काटने का काम शुरू किया गया। इसी दौरान एक पक्ष की कुछ महिलाएं पेड़ कटाई का विरोध करने लगीं और मशीन के पास पहुंच गईं। वायरल वीडियो में इसी दौरान धक्का-मुक्की की स्थिति दिखाई देती है, जिसमें थाना प्रभारी द्वारा एक महिला पर हाथ उठाने का आरोप लगाया जा रहा है।
घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। कई लोगों ने सवाल उठाया है कि जब मौके पर महिला पुलिसकर्मी मौजूद थीं, तब किसी महिला को नियंत्रित करने या हटाने की कार्रवाई पुरुष अधिकारी द्वारा क्यों की गई। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं से जुड़े मामलों में कार्रवाई के लिए महिला पुलिसकर्मियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और पुरुष अधिकारियों द्वारा बल प्रयोग केवल विशेष परिस्थितियों में ही किया जा सकता है।
हालांकि, एसओ आदित्य सिंह ने महिला को थप्पड़ मारने के आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि कुछ महिलाएं चल रही आरा मशीन की ओर तेजी से बढ़ रही थीं, जिससे गंभीर हादसा हो सकता था। ऐसी स्थिति को रोकने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उन्हें पीछे हटाया गया था। उन्होंने दावा किया कि किसी के साथ दुर्व्यवहार नहीं किया गया।
इस बीच, मानवाधिकार और पुलिस प्रक्रिया से जुड़े विशेषज्ञों ने मामले को गंभीर बताया है। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की गाइडलाइंस महिलाओं के साथ पुलिस कार्रवाई को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश देती हैं। ऐसे में वायरल वीडियो की निष्पक्ष जांच आवश्यक है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मौके पर वास्तव में क्या हुआ था और क्या किसी नियम का उल्लंघन हुआ है।
फिलहाल यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और स्थानीय प्रशासन पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटाने में लगा है। वीडियो वायरल होने के बाद लोगों की नजर अब पुलिस विभाग की संभावित जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है।

