राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन मधुकर भागवत ने सोमवार को कारवाल नगर में उत्तर प्रदेश के पहले संघ भवन का उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम में संघ के अनेक कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शामिल हुए। अपने संबोधन में डॉ. भागवत ने कहा कि भारत को एक हिंदू राष्ट्र के रूप में स्थापित करने के लिए समाज के हर वर्ग को सक्रिय योगदान देना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि “भारत हिंदू समाज का घर है” और संघ एक ऐसा माध्यम है, जो व्यक्ति के जीवन में पवित्रता और करुणा का संचार करता है।
डॉ. भागवत ने बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर को याद करते हुए कहा कि उन्होंने हिंदू समाज को जातिगत भेदभाव से ऊपर उठाने का महान कार्य किया। उन्होंने समाज में एकता और समरसता की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने यह भी बताया कि संघ का उद्देश्य जीवन में नैतिकता, सहिष्णुता और सेवा भावना को बढ़ावा देना है। इस दौरान उन्होंने अपनी आगामी यात्रा की जानकारी दी, जिसमें वे पांच दिन शहर में रुककर संघ के शताब्दी वर्ष की तैयारियों को लेकर क्षेत्रीय प्रचारकों के साथ विचार-विमर्श करेंगे। यह योजना देशभर में लागू की जाएगी। इसके अलावा सेवा, समरसता और पर्यावरण के क्षेत्र में किए जाने वाले कार्यों पर भी चर्चा की जाएगी।
इस नए संघ भवन का निर्माण पूरी तरह भारतीय परंपरा और मूल्यों को ध्यान में रखते हुए किया गया है। भवन में राजस्थान से मंगवाए गए लाल पत्थरों का उपयोग किया गया है, वहीं इसकी दीवारों पर गोबर मिश्रित पारंपरिक पेंट से रंग किया गया है। भवन के बेसमेंट में पार्किंग की सुविधा है और एक विशाल पुस्तकालय भी बनाई गई है, जिसमें हिंदू धर्म, संस्कृति और भारतीय इतिहास से संबंधित ज्ञानवर्धक पुस्तकें रखी गई हैं।
यह कार्यालय उत्तर प्रदेश में संघ का पहला पूर्ण रूप से समर्पित भवन है, और डॉ. मोहन भागवत पहले सरसंघचालक बने हैं जो यहां निवास करेंगे और संघ कार्यों का मार्गदर्शन करेंगे।

