22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई। हमलावरों ने जानबूझकर केवल पुरुषों को निशाना बनाया, जिससे कई महिलाएं विधवा हो गईं और बच्चों ने अपने पिता को खो दिया। इस दर्दनाक घटना ने पूरे देश को गम और गुस्से में डुबो दिया।
इसके पंद्रह दिन बाद भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम से जवाबी कार्रवाई शुरू की। 7 मई को अंजाम दिए गए इस ऑपरेशन के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में मौजूद 9 आतंकवादी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया गया। इस साहसिक अभियान ने न सिर्फ शहीदों को श्रद्धांजलि दी, बल्कि पूरे देश में गर्व और देशभक्ति की लहर दौड़ा दी।
अब ‘सिंदूर’ केवल एक शब्द नहीं, बल्कि एक भावना बन चुका है – इसकी मिसाल उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में देखने को मिली, जहां महज दो दिनों के भीतर जन्मी 17 नवजात बच्चियों का नाम ‘सिंदूर’ रखा गया है।
“सिंदूर” – एक बेटी, एक प्रेरणा
कुशीनगर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आरके शाही ने बताया कि हाल ही में दो दिनों के भीतर 17 परिवारों ने अपनी बेटियों का नाम ‘सिंदूर’ रखा है। भेड़िहारी गांव की अर्चना शाही ने अपनी बेटी को जन्म देने के बाद उसका नाम पहले से तय कर रखा था – ‘सिंदूर’। उनके पति अजीत शाही ने कहा कि यह नाम उनके लिए सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति और साहस का प्रतीक है।
“हर बार याद रहेगा सेना का बलिदान”
पडरौना के मदन गुप्ता के परिवार ने भी अपनी नवजात बेटी का नाम ‘सिंदूर’ रखा है। उन्होंने बताया कि यह नाम ऑपरेशन सिंदूर की याद में रखा गया है, जिससे वे आने वाली पीढ़ी को सेना के बलिदान और साहस की याद दिलाते रहेंगे।
“साहसी बेटी की कामना में रखा नाम”
भठही बाबू गांव की एक महिला ने अपनी नवजात को ‘सिंदूर’ नाम देकर यह संदेश दिया कि वह अपनी बेटी में साहस, आत्मबल और देशभक्ति जैसे गुणों का संचार करना चाहती हैं। उनका विश्वास है कि जब उनकी बेटी बड़ी होगी, तो वह इस नाम के पीछे की कहानी को गर्व से समझेगी।
“ऑपरेशन सिंदूर से मिली प्रेरणा”
प्रियंका देवी नामक एक अन्य मां ने भी अपनी बेटी को ‘सिंदूर’ नाम दिया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने उनके भीतर देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा भर दिया है, और अब उनकी बेटी भी इसी जज्बे के साथ बड़ी होगी।
एक मिशन जो बना देश का अभिमान
22 अप्रैल को हुए कायराना हमले के बाद भारतीय सेना की यह जवाबी कार्रवाई – ऑपरेशन सिंदूर – ना सिर्फ बदला था, बल्कि यह भारत की ताकत, रणनीति और संकल्प का परिचायक बन गया। अब यह नाम उन बेटियों के साथ हमेशा के लिए जुड़ गया है, जिनका जन्म ऐसे समय में हुआ जब देश एकजुट होकर आतंक के खिलाफ खड़ा था।

