मोदी सरकार के केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के अध्यक्ष जयंत चौधरी ने आधिकारिक संपत्ति घोषणा में 31 मार्च 2025 तक क्रिप्टोकरेंसी (वर्चुअल डिजिटल एसेट्स) में 21.31 लाख रुपये के निवेश का खुलासा किया है। उनकी पत्नी चारु सिंह ने भी इसी अवधि में 22.41 लाख रुपये की क्रिप्टो होल्डिंग उजागर की। दोनों ने बताया कि यह निवेश पूरी तरह व्यक्तिगत बचत से किया गया है। खास बात यह है कि जयंत चौधरी ऐसा करने वाले मोदी सरकार के पहले मंत्री बन गए हैं, जिन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी क्रिप्टो संपत्ति को स्वीकारा है।
प्रधानमंत्री कार्यालय की वेबसाइट पर हर वित्त वर्ष के अंत में केंद्रीय मंत्रियों की संपत्ति व देनदारी का खुलासा किया जाता है। इनमें जयंत और उनकी पत्नी ने लगातार दूसरी बार क्रिप्टो इन्वेस्टमेंट का उल्लेख किया है। पिछली साल की रिपोर्ट में भी जयंत ने 17.9 लाख और चारु ने 19 लाख रुपये क्रिप्टो में निवेश बताया था, जो कि इस साल 19% और 18% बढ़े हैं।
जयंत चौधरी ने बताया कि जब उन्होंने निवेश किया, तब यह उनके पोर्टफोलियो का मात्र 2-3% था। वे इसे ‘उच्च जोखिम’ वाली, लेकिन पोर्टफोलियो में विविधता और कला निवेश की तरह मानते हैं। उन्होंने किस क्रिप्टोकरेंसी में निवेश किया, यह उजागर नहीं किया।
विशेषज्ञों की मानें तो भारत में अभी क्रिप्टोकरेंसी पूरी तरह विनियमित (regulate) नहीं है, मगर केंद्रीय मंत्री द्वारा संपत्ति में ये खुलासा एक साहसिक और नई प्रवृत्ति है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी संसद में कह चुके हैं कि इन संपत्तियों से अर्जित आय कर योग्य (taxable) है, और मार्च 2023 से वर्चुअल डिजिटल एसेट लेनदेन मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून (PMLA) के अंतर्गत भी आते हैं।
जयंत चौधरी और उनकी पत्नी की कुल घोषित संपत्ति में अन्य पारंपरिक होल्डिंग्स भी हैं – जयंत के पास 33.23 करोड़ की अचल और 14.51 करोड़ की चल संपत्ति है, वहीं चारु सिंह ने 2.15 करोड़ की अचल और 9.54 करोड़ की चल संपत्ति घोषित की है। हालांकि, क्रिप्टो में खुली घोषणा से वे मोदी कैबिनेट में आर्थिक पारदर्शिता की एक नई लकीर खींचते हैं।

