दक्षिण एशिया में एक ओर जहां बांग्लादेश गंभीर राजनीतिक हिंसा और अस्थिरता से जूझ रहा है, वहीं भारत ने अपनी कूटनीतिक प्राथमिकताओं को साफ करते हुए पड़ोसी देश श्रीलंका के साथ संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इसी क्रम में विदेश मंत्री एस. जयशंकर मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशेष दूत के रूप में श्रीलंका पहुंचे, जहां वह शीर्ष नेतृत्व के साथ अहम बातचीत करेंगे।
यह दौरा ऐसे समय पर हो रहा है, जब श्रीलंका हाल ही में चक्रवात दितवाह से भारी तबाही झेल चुका है। भारत इस प्राकृतिक आपदा के बाद से लगातार श्रीलंका की मदद कर रहा है और मानवीय सहायता के मोर्चे पर सबसे आगे खड़ा है। डॉ. जयशंकर का यह दौरा राहत कार्यों की समीक्षा के साथ-साथ दोनों देशों के बीच राजनयिक सहयोग को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, एस. जयशंकर श्रीलंका के शीर्ष नेताओं से मुलाकात कर राहत समन्वय, लॉन्ग-टर्म रिकवरी प्लानिंग और भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति के तहत भविष्य के सहयोग पर चर्चा करेंगे। हालांकि बैठकों के एजेंडे को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन यह स्पष्ट है कि भारत श्रीलंका के साथ रणनीतिक और मानवीय साझेदारी को और गहराई देना चाहता है।
इस बीच भारत के एक अन्य पड़ोसी बांग्लादेश में हालात तेजी से बिगड़े हैं। वहां जारी हिंसा और राजनीतिक उथल-पुथल ने भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव पैदा कर दिया है। ऐसे माहौल में श्रीलंका दौरा यह संकेत देता है कि नई दिल्ली क्षेत्रीय स्थिरता और भरोसेमंद साझेदारी को प्राथमिकता दे रही है।
भारत की सहायता की बात करें तो 28 नवंबर को शुरू हुए ऑपरेशन सागर बंधु के तहत भारत अब तक श्रीलंका को 1,134 टन से अधिक मानवीय सहायता भेज चुका है। इसमें सूखा राशन, टेंट, तिरपाल, स्वच्छता किट, कपड़े, जल शुद्धिकरण प्रणाली, साथ ही 14.5 टन दवाइयां और शल्य चिकित्सा उपकरण शामिल हैं। इस राहत सामग्री को पहुंचाने में भारतीय नौसेना के जहाज INS विक्रांत, INS उदयगिरि, INS सुकन्या, INS घारियल और कई लैंडिंग क्राफ्ट ने अहम भूमिका निभाई।
राहत और बचाव कार्यों में भारत ने जमीन पर भी सक्रिय भूमिका निभाई। एनडीआरएफ की दो टीमों ने तुरंत खोज और बचाव अभियान चलाया, जबकि भारतीय सेना के 85 सदस्यीय फील्ड हॉस्पिटल ने 7,000 से अधिक मरीजों को जीवनरक्षक चिकित्सा सहायता दी। इसके अलावा, गंभीर रूप से प्रभावित इलाकों में भीष्म आरोग्य मैत्री क्यूब्स के जरिए चिकित्सा केंद्र स्थापित किए गए।
आपदा के बाद संपर्क व्यवस्था बहाल करने के लिए भारत ने 48 इंजीनियरों के साथ 248 टन बेली ब्रिज के हिस्सों को हवाई मार्ग से श्रीलंका भेजा, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन दोबारा संभव हो सका।
कुल मिलाकर, एस. जयशंकर का श्रीलंका दौरा न सिर्फ आपदा राहत से जुड़ा है, बल्कि यह भारत की उस रणनीति को भी दर्शाता है, जिसके तहत वह अपने पड़ोसियों के साथ भरोसे, सहयोग और स्थिरता पर आधारित रिश्तों को मजबूती देना चाहता है।

