2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश भाजपा ने दलित और आदिवासी समुदायों तक पहुंच मजबूत करने के लिए एक विशेष रणनीति तैयार की है। पार्टी के अनुसूचित जाति (SC) मोर्चा ने पूरे वर्ष का कैलेंडर जारी किया है, जिसके तहत राज्यभर में दलित और जनजातीय समाज के प्रमुख महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
राजनीतिक दलों के बीच डॉ. भीमराव आंबेडकर की विरासत को लेकर लगातार कार्यक्रम और दावे किए जा रहे हैं। ऐसे माहौल में भाजपा ने अपने अभियान को व्यापक स्वरूप देते हुए कई सामाजिक सुधारकों और प्रतीक व्यक्तित्वों को अपने कार्यक्रमों में शामिल किया है। पार्टी के कैलेंडर में प्रमुख रूप से कांशीराम, रामाबाई आंबेडकर, सावित्रीबाई फुले, संत गाडगे महाराज, स्वामी अछूतानंद, झलकारी बाई, दुर्बल महाराज, संत रविदास और ऊदा देवी जैसे नाम शामिल हैं। इसके अलावा आदिवासी नायकों बिरसा मुंडा और तिलका मांझी को भी विशेष रूप से याद किया जाएगा।
गौरतलब है कि कांशीराम, जो बहुजन समाज पार्टी (BSP) के संस्थापक थे, उनके नाम पर भी भाजपा कार्यक्रम आयोजित करेगी। पिछले वर्ष उनकी पुण्यतिथि पर मायावती ने लखनऊ में रैली की थी, जबकि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने भी श्रद्धांजलि कार्यक्रम किए थे। वहीं, चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व वाली आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) भी इस मौके पर आयोजन करती रही है।
भाजपा के SC मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष राम चंद्र कनौजिया ने कहा कि पार्टी का उद्देश्य दलित और कमजोर वर्गों का विश्वास जीतना और समाज के विभिन्न वर्गों—ऊंची जातियों, पिछड़ों और दलितों—के बीच समन्वय स्थापित करना है। उन्होंने बताया कि जिला इकाइयों को विस्तृत कार्यक्रम कैलेंडर भेज दिया गया है, ताकि राज्यभर में भव्य आयोजन सुनिश्चित किए जा सकें।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पहल 2027 के चुनावों से पहले सामाजिक आधार को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है। दलित और आदिवासी मतदाताओं को साधने के लिए भाजपा का यह व्यापक कार्यक्रम आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की सियासत में अहम भूमिका निभा सकता है।

