नोएडा में अप्रैल महीने में हुए श्रमिक आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा और आगजनी मामले में पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने घटना के मुख्य आरोपियों में शामिल नरेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर मजदूरों को भड़काने, हिंसा फैलाने और कई वाहनों में आग लगाने का आरोप है।
पुलिस के अनुसार, 13 अप्रैल को सेक्टर-63 स्थित औद्योगिक क्षेत्र में श्रमिक आंदोलन के दौरान हालात अचानक बेकाबू हो गए थे। बड़ी संख्या में मजदूर सड़क पर उतर आए थे और देखते ही देखते हिंसा शुरू हो गई। इस दौरान कई चार पहिया और दो पहिया वाहनों में आग लगा दी गई थी, जबकि कई गाड़ियों में तोड़फोड़ भी की गई। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया था।
जांच में सामने आया है कि मूल रूप से फतेहपुर निवासी नरेश कुमार घटना वाले दिन कंपनी परिसर पहुंचा था, जहां उसने कर्मचारियों को हड़ताल और प्रदर्शन के लिए उकसाया। इसके बाद वह मजदूरों की भीड़ को लेकर सड़क पर उतर आया। पुलिस का आरोप है कि इसके बाद उपद्रवियों ने सुनियोजित तरीके से सेक्टर-63 स्थित विपुल मोटर्स के पास खड़ी गाड़ियों को निशाना बनाया और उनमें आग लगा दी।
पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने बताया कि यह हिंसा अचानक नहीं हुई थी, बल्कि पूरी घटना पहले से योजनाबद्ध थी। वायरल वीडियो और तकनीकी जांच के जरिए आरोपी की पहचान की गई। वीडियो फुटेज में नरेश कुमार खुद आगजनी और हिंसा में शामिल दिखाई दिया।
जांच एजेंसियों को आरोपी के मोबाइल फोन से श्रमिक यूनियन से जुड़े कई दस्तावेज और रिकॉर्ड भी मिले हैं। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी ने घटना के बाद अपना मोबाइल नंबर दूसरी कंपनी में पोर्ट करा लिया था, लेकिन सर्विलांस और तकनीकी साक्ष्यों की मदद से उसकी लोकेशन ट्रेस कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी पहले हरियाणा के मानेसर में हुए श्रमिक आंदोलनों से भी जुड़ा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि वह संगठित तरीके से मजदूरों को उकसाने और आंदोलन को हिंसक बनाने में सक्रिय भूमिका निभाता रहा है।
इस मामले में नोएडा और ग्रेटर नोएडा के अलग-अलग थानों में कई मुकदमे दर्ज किए गए हैं। पुलिस अब तक इस केस में रूपेश राय, हिमांशु ठाकुर, सत्यम वर्मा, आकृति चौधरी और सुमित समेत 6 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। बाकी फरार आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है।
पुलिस का कहना है कि हिंसा फैलाने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। वहीं इस घटना ने औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और श्रमिक आंदोलनों के दौरान कानून-व्यवस्था को लेकर कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं।

