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लखनऊ के इलाके में अवैध दुकानों पर चला बुलडोज़र, स्थानीय निवासियों में आक्रोश

लखनऊ के बालू अड्डा इलाके में अवैध रूप से बसे लोगों के खिलाफ प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है। करीब 25 सालों से यहाँ बसे लोग अचानक प्रशासन के बुलडोज़र के निशाने पर आ गए, जब एलडीए और नगर निगम की संयुक्त टीम ने इस अभियान के तहत लगभग 30 झोपड़ियों और 10 दुकानों को ध्वस्त कर दिया। अधिकारियों के मुताबिक, इन लोगों को तीन दिन पहले नोटिस दिया गया था, लेकिन स्थानीय लोग इस दावे को नकारते हुए दावा कर रहे हैं कि उन्हें कोई नोटिस नहीं मिला था।

अधिकारियों ने कहा कि बालू अड्डा इलाके में अवैध अतिक्रमण की स्थिति लंबे समय से थी और तीन दिन पहले वहाँ रह रहे लोगों को चेतावनी दी गई थी कि वे अपनी संपत्ति हटा लें। यह कार्रवाई सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त करने के उद्देश्य से की गई है।

हालाँकि, झोपड़ियों में रह रहे लोग इस कार्रवाई को लेकर नाराज हैं। एक स्थानीय युवक ने बताया, “हम 25 साल से यहां रह रहे हैं। अचानक दो दिन पहले अधिकारियों ने आकर कहा कि सब कुछ हटा लो। इतनी जल्दी हम सब कुछ कैसे हटा सकते हैं?” वे यह भी आरोप लगा रहे हैं कि सरकार ने उन्हें पुनर्वास के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की है। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “सरकार चुनाव के समय हमारे पास वोट मांगने आती है, लेकिन अब हमें हमारे घरों से बेघर कर दिया जा रहा है। इतनी ठंड में हम कहाँ जाएँ?”

स्थानीय दुकानदारों ने भी पुलिस और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एक दुकानदार ने बताया, “यहां हर महीने 1500 रुपये थाने और चौकी को दिए जाते थे, ताकि हमें यहां से न हटाया जाए। लेकिन अब वही लोग हमारी रोज़ी-रोटी छीन रहे हैं।”

अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह कार्रवाई न्यायालय के आदेशों के तहत की गई है और सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे को हटाना आवश्यक था। उन्होंने यह भी कहा कि इस अभियान को आगे भी जारी रखा जाएगा।

रहवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि उन्हें कहीं और बसाने का इंतजाम किया जाए। उनका कहना है कि बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के इस तरह की कार्रवाई से उनका जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। बालू अड्डा इलाके में बुलडोज़र की कार्रवाई के बाद स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है, और स्थानीय स्तर पर विरोध और आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

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