उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जनपद की पुलिस अधीक्षक, आईपीएस अधिकारी दीक्षा शर्मा को गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति वीरता पदक से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान उन्हें उनके साहसिक कार्यों और पुलिस सेवा में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया जा रहा है। दीक्षा शर्मा उत्तर प्रदेश के सबसे तेज-तर्रार आईपीएस अफसरों में मानी जाती हैं।
आईपीएस दीक्षा शर्मा अपने सख्त और निष्पक्ष रवैये के लिए जानी जाती हैं। वे किसी भी मामले में त्वरित निर्णय लेने के लिए प्रसिद्ध हैं और अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्यवाही करती हैं। ईमानदारी और अनुशासन उनकी पहचान बन चुके हैं, और यही कारण है कि वे अपने विभाग में लापरवाह पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई करने से नहीं चूकतीं।
दीक्षा शर्मा उत्तर प्रदेश कैडर की 2017 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं और मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में 1 मई 1990 को जन्मी थीं। वे बचपन से ही बेहद होशियार थीं और एमबीबीएस (MBBS) की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद, दिल्ली के एक प्रतिष्ठित अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ के रूप में काम करने लगीं। लेकिन, डॉक्टर बनने के बावजूद, दीक्षा शर्मा ने यूपीएससी (UPSC) परीक्षा में सफलता पाने का सपना देखा और अपने पहले ही प्रयास में 2017 में सिविल सेवा परीक्षा को उत्तीर्ण कर लिया।
आईपीएस की ट्रेनिंग पूरी करने के बाद, दीक्षा शर्मा ने गाजियाबाद में अपनी तैनाती के दौरान एक महत्वपूर्ण मामले में आरोपी को सिर्फ 65 दिन में फांसी की सजा दिलवाई।
आईपीएस दीक्षा शर्मा के पति, आईएएस अधिकारी रविंद्र सिंह हैं, जो राजस्थान के झुंझुनू जिले के निवासी हैं। रविंद्र सिंह ने आईआईटी मुंबई से कंप्यूटर साइंस में बीटेक किया और 2014 बैच में यूपीएससी परीक्षा पास कर आईएएस बने। उन्हें मणिपुर कैडर मिला था, लेकिन बाद में केंद्र सरकार की गाइडलाइन्स के तहत उनका ट्रांसफर उत्तर प्रदेश हुआ, जहां उनकी मुलाकात दीक्षा शर्मा से हुई।

