लखनऊ में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के अवैध निर्माण और बिक्री के कारोबार का खुलासा हुआ है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) और एसटीएफ ने मदेयगंज के एक मकान में चल रहे इस अवैध धंधे को पकड़ा। एसटीएफ द्वारा की गई छापेमारी लगभग 12 घंटे तक चली, जिसमें मकान से 70 लाख रुपये का ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन, मशीनें और अन्य उपकरण बरामद किए गए। इस कार्रवाई ने लखनऊ में हड़कंप मचा दिया है।
नवंबर महीने में भी एसटीएफ ने ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की तस्करी करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया था। एफएसडीए और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने छापेमारी के दौरान गिरोह के दो सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया और ठाकुरगंज थाने में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। अधिकारियों के अनुसार, इन अवैध कारोबारियों ने इंजेक्शन में फिनाइल मिलाकर उसे बेचने का काम किया था। फिनाइल मिलाने से यह इंजेक्शन दुधारू पशुओं और सब्जियों में इस्तेमाल किया जाता था। इंजेक्शन की गुणवत्ता की जांच के लिए नमूना भेजा गया है।
एसटीएफ को कई दिनों से बिहार से ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की तस्करी करने की जानकारी मिल रही थी, जिसके बाद टीम ने सक्रिय रूप से काम करना शुरू किया। एसटीएफ के अपर पुलिस अधीक्षक अमित कुमार नागर के नेतृत्व में सूचनाओं का संग्रह किया गया और फिर विनोद कुमार सिंह की अगुवाई में एक टीम बनाई गई, जिसने लखनऊ के विभिन्न इलाकों से जानकारी जुटाई।
एसटीएफ अधिकारियों ने बताया कि इस गिरोह ने ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन में फिनाइल मिलाया था, जो इंसानों और जानवरों दोनों के लिए बेहद घातक है। गिरोह के सदस्य लखनऊ के बालागंज क्षेत्र के आदर्श नगर में अवैध दवा भरने का काम करते थे।
इसके अलावा, एसटीएफ ने अंतर्राज्यीय तस्करी करने वाले गिरोह के दो सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया, जिनके पास से 2,21,960 मिलीलीटर ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन बरामद हुआ, जिसकी कीमत 39,53,327 रुपये बताई गई।

