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यूपी में अरबों के हाईवे घोटालों पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की ईसीआईआर दर्ज नहीं की

हाईवे घोटालों की लंबी फेहरिस्त के बावजूद, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अब तक प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज करना जरूरी नहीं समझा। इन घोटालों से जुटाई गई रकम को अलग-अलग खातों में स्थानांतरित कर मनी लॉन्ड्रिंग का खेल खेला गया है, जिसमें भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अधिकारी भी शामिल बताए जा रहे हैं। जिन हाईवे घोटालों की जांच सीबीआई को सौंपी गई है, वहां भी ईडी को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) का उल्लंघन नजर नहीं आ रहा।

बरेली-पीलीभीत-सितारगंज हाईवे और बरेली रिंग रोड घोटाला सबसे पहले चर्चा में आया था, जहां भूमि अधिग्रहण में 200 करोड़ रुपये से अधिक की गड़बड़ी उजागर हुई। साजिश के तहत 50 लाख रुपये तक अधिक मुआवजा वितरित किया गया। इस मामले में एनएचएआई के दो परियोजना निदेशकों समेत 21 से ज्यादा लोग दोषी पाए गए, फिर भी ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की संभावना को नजरअंदाज कर दिया और ईसीआईआर दर्ज नहीं की।

शाहजहांपुर-बीसलपुर फोरलेन के चौड़ीकरण में भी घोटालेबाजों ने खेल किया और 75 करोड़ रुपये से ज्यादा का गबन कर लिया। इस धोखाधड़ी में जमीन की खरीद-फरोख्त करने वाले लखनऊ समेत आधा दर्जन शहरों के प्रभावशाली लोग शामिल हैं। परिवहन मंत्रालय को विस्तृत जांच के लिए शिकायत भी भेजी गई, लेकिन फिर भी ईडी ने कोई कदम नहीं उठाया।

जिन लोगों ने करोड़ों के इन घोटालों की बुनियाद रखी, उनके पास बेहिसाब संपत्तियां हैं। अमेठी में एनएच 56 परियोजना में किए गए 382 करोड़ रुपये के घोटाले का भी यही हाल है। इस मामले में एनएचएआई के अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठे हैं। सरकारी नुकसान की भरपाई के लिए कानूनगो की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया, जिसमें दो तत्कालीन एसडीएम को नामजद किया गया है।

इसके अलावा, आधा दर्जन से ज्यादा पीसीएस अधिकारी भी इस घोटाले की चपेट में आ चुके हैं। हालांकि, ईडी ने घोटाले की एफआईआर का संज्ञान लेने की जरूरत नहीं समझी। लखनऊ में अरबों की लागत से बन रही आउटर रिंग रोड के निर्माण में भी अनियमितताओं की जांच सीबीआई कर रही है। शुरुआत में एनएचएआई ने इस प्रोजेक्ट का ठेका गुजरात की सद्भाव इंजीनियरिंग को दिया, लेकिन समय पर काम पूरा न होने के कारण यह गावर कंस्ट्रक्शन को सौंप दिया गया। घटिया निर्माण की वजह से सड़कें उखड़ने लगी हैं। कोर्ट के आदेश पर कानपुर और लखनऊ में एफआईआर दर्ज की गई, मगर ईडी ने अब तक मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज नहीं किया है।

मिर्जापुर टोल प्लाजा में एसटीएफ ने 120 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े का खुलासा किया, जिसकी कड़ियां देशभर के 200 टोल प्लाजा से जुड़ी हुई हैं। घोटाले की रकम हजारों करोड़ रुपये में आंकी जा रही है, जिसे कई बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया। लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे भूमि घोटाले में भी ईडी की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई, जबकि कानपुर की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने अपनी जांच रिपोर्ट शासन को भेज रखी है।

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