लखनऊ में एडवोकेट अमेंडमेंट बिल 2025 को लेकर वकीलों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। इस बिल के विरोध में आज उत्तर प्रदेश के वकील हड़ताल पर हैं, जिसे सेंट्रल बार एसोसिएशन, लखनऊ का भी समर्थन प्राप्त है।
दरअसल, केंद्र सरकार द्वारा 2025 में प्रस्तावित इस संशोधन विधेयक को लेकर वकीलों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि यह बिल अधिवक्ता हितों के विपरीत है और इससे उनकी स्वायत्तता तथा स्वतंत्रता को खतरा हो सकता है। वकीलों के विरोध को देखते हुए उत्तर प्रदेश बार काउंसिल ने न्यायिक कार्यों से दूर रहने का आह्वान किया है।
गौरतलब है कि कानून मंत्रालय ने एडवोकेट अमेंडमेंट बिल 2025 का मसौदा जारी किया है, जिसमें एडवोकेट एक्ट-1961 में कई महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित हैं। सरकार का तर्क है कि इस संशोधन का उद्देश्य कानूनी शिक्षा और वकालत के पेशे को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाना है। इसके जरिए वकीलों को आधुनिक कानूनी जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित किया जाएगा और पेशेवर मानकों को मजबूत किया जाएगा। हालांकि, वकीलों का कहना है कि जब तक यह बिल वापस नहीं लिया जाता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
वकीलों की आपत्तियां
वकीलों का कहना है कि इस बिल में कुछ प्रावधान उनके पेशे के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं। प्रस्तावित कानून के अनुसार, किसी भी वादी को अपने वकील के खिलाफ शिकायत दर्ज करने का अधिकार मिलेगा, जिसे बार काउंसिल द्वारा जांचा जाएगा। यदि शिकायत सही पाई गई, तो वकील पर तीन लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
वकीलों का मानना है कि यह प्रावधान उनके पेशे की स्वतंत्रता को प्रभावित करेगा। इसके अलावा, बिल में अन्य ऐसे कई प्रावधान शामिल हैं, जो वकीलों के अधिकारों के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। इस मुद्दे पर वकील संगठनों ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के पदाधिकारियों से भी चर्चा की, जिन्होंने वकीलों की चिंताओं का समर्थन किया है।
वकीलों का साफ कहना है कि जब तक इस संशोधन विधेयक को वापस नहीं लिया जाता, उनका विरोध जारी रहेगा।

