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यूपी के शाहजहांपुर में मस्जिदों को तिरपाल से ढकने का फैसला क्यों लिया गया ?

    उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में होली के मौके पर परंपरागत लाट साहब का जुलूस निकाला जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए शहर की 67 मस्जिदों और मजारों को तिरपाल और काली पन्नी से ढंका जा रहा है, ताकि उन पर रंग न पड़े। पुलिस प्रशासन के अनुसार, यह कोई नया नियम नहीं है, बल्कि सालों से चली आ रही परंपरा के तहत ही किया जा रहा है। शाहजहांपुर के एसपी राजेश एस ने बताया कि पीस कमेटी के साथ बैठक हो चुकी है और सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सुरक्षा व्यवस्था के तहत पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है, और हुड़दंगियों पर नजर रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।

    लाट साहब का जुलूस ब्रिटिश हुकूमत के एक क्रूर अफसर के विरोध का प्रतीक माना जाता है। हर साल इस जुलूस के लिए एक युवक को लाट साहब के रूप में चुना जाता है, जिसे बैलगाड़ी पर बिठाकर शहरभर में घुमाया जाता है। इस दौरान लोग उस पर अबीर-गुलाल के साथ जूते-चप्पल भी फेंकते हैं। शाहजहांपुर में दो लाट साहब के जुलूस निकलते हैं—छोटा लाट साहब और बड़ा लाट साहब। छोटे लाट साहब का जुलूस सरायकाईयां मुहल्ले से शुरू होकर विभिन्न क्षेत्रों से गुजरता है और अंत में सरायकाईयां पुलिस चौकी पर समाप्त होता है।

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