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रूस का ट्रंप को करारा जवाब: “भारत अपने हितों से समझौता नहीं करेगा”, अमेरिकी दावे पर तीखी प्रतिक्रिया l

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और वैश्विक कूटनीति में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने एक प्रेस ब्रीफिंग में दावा किया कि “भारत अब रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा” और यह फैसला “नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच बढ़ते रणनीतिक सहयोग” का प्रतीक है। हालाँकि, इस दावे पर रूस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है, और कहा है कि भारत एक संप्रभु देश है जो अपने ऊर्जा स्रोतों संबंधी फैसले किसी दबाव में नहीं लेता।

मॉस्को स्थित रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने बुधवार को कहा, “कुछ देशों को यह स्वीकार करना होगा कि भारत अपनी विदेश और ऊर्जा नीति स्वतंत्र रूप से तय करता है। हमारे और भारत के बीच संबंध गहरे भरोसे और व्यावहारिक सहयोग पर आधारित हैं, न कि किसी तीसरे देश के दबाव पर।”

रूसी बयान के अनुसार, भारत और रूस के बीच ऊर्जा व्यापार पिछले चार वर्षों में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा है, और “यह व्यापार दोनों देशों के हित में जारी रहेगा।” सूत्रों का कहना है कि भारत अभी तक रूस से सस्ती दरों पर कच्चा तेल खरीदता रहा है, जिससे घरेलू ऊर्जा बाजार को स्थिर बनाए रखने में मदद मिली है।

नई दिल्ली में इस मुद्दे पर विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि भारत की प्राथमिकता हमेशा ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हित रहे हैं। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “भारत अपनी नीति किसी देश की टिप्पणी पर नहीं, बल्कि अपने आर्थिक और रणनीतिक हितों को देखकर तय करता है। ऊर्जा का स्रोत वह होगा जो हमें अनुकूल शर्तों पर हमारे लोगों को लाभ पहुंचा सके।”

वहीं अमेरिकी प्रशासन की ओर से बयान जारी करते हुए कहा गया कि राष्ट्रपति ट्रंप “भारत के साथ साझेदारी को और मजबूत करने” की दिशा में काम कर रहे हैं, और अमेरिका चाहता है कि भारत वैश्विक ऊर्जा बाजार में विविधता लाए ताकि “रूस पर निर्भरता” घटे।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयानबाजी मौजूदा यूक्रेन युद्ध और उससे जुड़े प्रतिबंधों के संदर्भ में की गई है। अमेरिका लगातार प्रयास कर रहा है कि उसके सहयोगी देश रूस से ऊर्जा आयात सीमित करें, जबकि भारत ने हमेशा यह रुख अपनाया है कि राष्ट्रीय जरूरतों को देखते हुए ऊर्जा खरीद “राजनीतिक मुद्दा नहीं होनी चाहिए।”

अंतरराष्ट्रीय संबंध विशेषज्ञ प्रो. हरिश ठाकुर का कहना है, “रूस और भारत के बीच ऊर्जा, रक्षा और विज्ञान क्षेत्रों में सहयोग दशकों पुराना है। अमेरिका की बदलती प्राथमिकताओं के बावजूद भारत को अपने रणनीतिक हितों को संतुलित रखना होगा। ट्रंप के बयान से रूस को असहजता हुई है, लेकिन यह स्थिति भारत के निर्णायक रुख से ही संतुलित हो सकती है।”

बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, इस बयान का तत्काल असर तेल की कीमतों पर नहीं पड़ा है, लेकिन आगामी अंतरराष्ट्रीय बैठकों में इस मुद्दे पर चर्चा गरमा सकती है। वॉशिंगटन और मॉस्को दोनों इस समय भारत के साथ अपने-अपने संबंधों को मजबूत करने में व्यस्त हैं, और नई दिल्ली इसका लाभ कूटनीतिक संतुलन बनाकर उठा रही है।

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