आखिर कौन देता है ‘तूफानों’ के नाम

नई दिल्ली – इस वक्त चक्रवात ने देश के कई हिस्सों में काफी उथल पुथल मचा रखी है। हाल ही मे बंगाल और ओड़िसा में आये अम्फान तूफ़ान ने भारी तबाही मचाई वही अब निसर्ग गुजरात और महाराष्ट्र में दस्तक दे रहा है। लेकिन जब कोई तूफान आता है तो उसे एक अलग नाम से जाना जाता है जो कि काफी अनोखा होता है। लेकिन इन नामो को दिए जाने के पीछे क्या कारण होता है ये हम आपको बताते है

हिंदमहासागर में हर साल अलग-अलग तरह के चक्रवाती तूफान आते रहते हैं। इन तूफानों का असर 8 देशों (भारत, बांग्‍लादेश, मालदीव, म्‍यांमार, ओमान, पाकिस्‍तान, श्रीलंका और थाइलैंड) पर पड़ता है। इसलिए साल 2000 से ऐसी परंपरा शुरू हुई थी कि ये सभी आठ देश अपने-अपने हिसाब से तूफानों का नामकरण करेंगे।

साल 2004 में सभी आठ देशों के बीच तूफानों के नाम रखे जाने को लेकर सहमि‍त बनीं। सभी देशों द्वारा कुल 64 नाम चुने गए हैं। इनमें सभी देशों ने अपनी तरफ से आठ नाम दिए हैं। इन नामों की सूची World Meteorological Organization के पास सुरक्षित रखी गई है जिसका मुख्यालय जेनेवा में है। अब हिंदमहासागर में जब भी कोई तूफान आता है तो WMO सीरियल के आधार पर उस लिस्‍ट में आने वाले नाम पर तूफान का नाम रख देता है।

जब तूफानों के नाम देने की बारी आयी तो भारत की तरफ से जो आठ नाम दिए वो है अग्नि, आकाश, बिजली, जल, लहर, मेघ, सागर और वायु ,वहीं पाकिस्तान ने बड़े ही दिलचस्प नाम दिए। पाक की ओर से फानूस, लैला, नीलम, वरदाह, तितली और बुलबुल के अलावा 2 और नाम दिए हैं तो वहीं बांग्लादेश ने नाम दिया था Fani जिसने अभी हाल ही में खूब तबाही मचाई थी इसका वहां उच्चारण फोनि किया जाता है।

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